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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 39

अध्याय 11 · श्लोक 39

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च । नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥ ३९॥

vāyur yamo 'gnir varuṇaḥ śaśāṅkaḥ prajāpatis tvaṃ prapitāmahaś ca | namo namas te 'stu sahasra-kṛtvaḥ punaś ca bhūyo 'pi namo namas te ||39||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

वायुः: वायु; यमः: यम; अग्निः: अग्नि; वरुणः: वरुण; शशाङ्कः: चंद्रमा; प्रजापतिः: प्रजापति; त्वम्: आप; प्रपितामहः: परदादा (ब्रह्मा के भी पिता); च: और; नमः: नमस्कार; नमः: नमस्कार; ते: आपको; अस्तु: हो; सहस्रकृत्वः: हजारों बार; पुनः: फिर; च: और; भूयः: फिर; अपि: भी; नमः: नमस्कार; नमः: नमस्कार; ते: आपको।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

आप वायु, यम, अग्नि, वरुण, चंद्रमा, प्रजापति और प्रपितामह (ब्रह्मा के भी पिता) हैं। आपको हजारों बार नमस्कार है, बार-बार नमस्कार है, नमस्कार है।

English Translation

You are Vayu, Yama, Agni, Varuna, the moon, and Prajapati, and the great-grandfather (of all). Salutations to You, a thousand times salutations to You! Salutations to You again and again!

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन भगवान् को विभिन्न देवताओं के रूप में पहचानते हैं और बार-बार नमस्कार करते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।