विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 38
श्लोक ३८ में अर्जुन भगवान् को आदिदेव और सर्वव्यापक बताते हैं। Verse 38: Arjuna praises the Lord as the primal God and all-pervading.
संस्कृत श्लोक
त्वमादिदेवः पुरुषः पुराणस्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् । वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूप ॥ ३८॥
tvam ādi-devaḥ puruṣaḥ purāṇas tvam asya viśvasya paraṃ nidhānam | vettāsi vedyaṃ ca paraṃ ca dhāma tvayā tataṃ viśvam ananta-rūpa ||38||
पदच्छेद / शब्दार्थ
त्वम्: आप; आदिदेवः: आदि देव; पुरुषः: पुरुष; पुराणः: पुरातन; त्वम्: आप; अस्य: इस; विश्वस्य: विश्व के; परम्: परम; निधानम्: आश्रय; वेत्ता: जानने वाले; असि: हैं; वेद्यम्: जानने योग्य; च: और; परम्: परम; च: और; धाम: धाम; त्वया: आपसे; ततम्: व्याप्त; विश्वम्: विश्व; अनन्तरूप: हे अनंतरूप।
हिंदी अनुवाद
आप आदिदेव, पुरातन पुरुष हैं; आप इस विश्व के परम आश्रय हैं। आप ज्ञाता, ज्ञेय और परम धाम हैं। हे अनंतरूप, यह सम्पूर्ण विश्व आपसे ही व्याप्त है।
English Translation
You are the primal God, the ancient Purusha; You are the supreme refuge of this universe. You are the knower, the knowable, and the supreme abode. O infinite form, the whole universe is pervaded by You.
टीका / Commentary
भगवान् के सर्वव्यापकत्व का वर्णन।