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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 38

अध्याय 11 · श्लोक 38

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

त्वमादिदेवः पुरुषः पुराणस्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् । वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूप ॥ ३८॥

tvam ādi-devaḥ puruṣaḥ purāṇas tvam asya viśvasya paraṃ nidhānam | vettāsi vedyaṃ ca paraṃ ca dhāma tvayā tataṃ viśvam ananta-rūpa ||38||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

त्वम्: आप; आदिदेवः: आदि देव; पुरुषः: पुरुष; पुराणः: पुरातन; त्वम्: आप; अस्य: इस; विश्वस्य: विश्व के; परम्: परम; निधानम्: आश्रय; वेत्ता: जानने वाले; असि: हैं; वेद्यम्: जानने योग्य; च: और; परम्: परम; च: और; धाम: धाम; त्वया: आपसे; ततम्: व्याप्त; विश्वम्: विश्व; अनन्तरूप: हे अनंतरूप।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

आप आदिदेव, पुरातन पुरुष हैं; आप इस विश्व के परम आश्रय हैं। आप ज्ञाता, ज्ञेय और परम धाम हैं। हे अनंतरूप, यह सम्पूर्ण विश्व आपसे ही व्याप्त है।

English Translation

You are the primal God, the ancient Purusha; You are the supreme refuge of this universe. You are the knower, the knowable, and the supreme abode. O infinite form, the whole universe is pervaded by You.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् के सर्वव्यापकत्व का वर्णन।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।