आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 4

अध्याय 11 · श्लोक 4

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो । योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥ ४॥

manyase yadi tac chakyaṃ mayā draṣṭum iti prabho | yogeśvara tato me tvaṃ darśayātmānam avyayam ||4||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

मन्यसे: आप मानते हैं; यदि: यदि; तत्: वह; शक्यम्: संभव; मया: मेरे द्वारा; द्रष्टुम्: देखना; इति: इस प्रकार; प्रभो: हे प्रभु; योगेश्वर: हे योगेश्वर; ततः: तो; मे: मुझे; त्वम्: आप; दर्शय: दिखाइए; आत्मानम्: अपने को; अव्ययम्: अविनाशी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे प्रभो! यदि आप यह मानते हैं कि मैं आपके इस रूप को देख सकता हूँ, तो हे योगेश्वर, आप मुझे अपने उस अविनाशी स्वरूप का दर्शन कीजिए।

English Translation

If You think that it is possible for me to see this, O Lord, O Master of all yoga, then please show me Your imperishable Self.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन विनम्रतापूर्वक भगवान् से विराट रूप दिखाने का अनुरोध करते हैं, यह स्वीकार करते हुए कि यह उनकी कृपा से ही संभव है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।