विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 4
श्लोक ४ में अर्जुन भगवान् से अपना अविनाशी रूप दिखाने का अनुरोध करते हैं। Verse 4: Arjuna requests to see the imperishable form.
संस्कृत श्लोक
मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो । योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥ ४॥
manyase yadi tac chakyaṃ mayā draṣṭum iti prabho | yogeśvara tato me tvaṃ darśayātmānam avyayam ||4||
पदच्छेद / शब्दार्थ
मन्यसे: आप मानते हैं; यदि: यदि; तत्: वह; शक्यम्: संभव; मया: मेरे द्वारा; द्रष्टुम्: देखना; इति: इस प्रकार; प्रभो: हे प्रभु; योगेश्वर: हे योगेश्वर; ततः: तो; मे: मुझे; त्वम्: आप; दर्शय: दिखाइए; आत्मानम्: अपने को; अव्ययम्: अविनाशी।
हिंदी अनुवाद
हे प्रभो! यदि आप यह मानते हैं कि मैं आपके इस रूप को देख सकता हूँ, तो हे योगेश्वर, आप मुझे अपने उस अविनाशी स्वरूप का दर्शन कीजिए।
English Translation
If You think that it is possible for me to see this, O Lord, O Master of all yoga, then please show me Your imperishable Self.
टीका / Commentary
अर्जुन विनम्रतापूर्वक भगवान् से विराट रूप दिखाने का अनुरोध करते हैं, यह स्वीकार करते हुए कि यह उनकी कृपा से ही संभव है।