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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 3

अध्याय 11 · श्लोक 3

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

एवमेतद्यथा त्थ त्वमात्मानं परमेश्वर । द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥ ३॥

evam etad yathāttha tvam ātmānaṃ parameśvara | draṣṭum icchāmi te rūpam aiśvaraṃ puruṣottama ||3||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

एवम्: ऐसे; एतत्: यह; यथा: जैसे; आत्थ: आपने कहा; त्वम्: आप; आत्मानम्: अपने को; परमेश्वर: हे परमेश्वर; द्रष्टुम्: देखने की; इच्छामि: इच्छा करता हूँ; ते: आपका; रूपम्: रूप; ऐश्वरम्: दिव्य; पुरुषोत्तम: हे पुरुषोत्तम।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे परमेश्वर! आपने अपने विषय में जैसा कहा है, वह सब सत्य है; फिर भी हे पुरुषोत्तम, मैं आपके ऐश्वर्यमय रूप को देखना चाहता हूँ।

English Translation

O Supreme Lord, as You have described Yourself, I wish to see Your divine form, O Purushottama.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अब प्रत्यक्ष रूप से भगवान् के विराट रूप के दर्शन की इच्छा व्यक्त करते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।