विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 3

श्लोक ३ में अर्जुन भगवान् के विराट रूप को देखने की इच्छा प्रकट करते हैं। Verse 3: Arjuna expresses his desire to see the universal form.

संस्कृत श्लोक

एवमेतद्यथा त्थ त्वमात्मानं परमेश्वर । द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥ ३॥

evam etad yathāttha tvam ātmānaṃ parameśvara | draṣṭum icchāmi te rūpam aiśvaraṃ puruṣottama ||3||

पदच्छेद / शब्दार्थ

एवम्: ऐसे; एतत्: यह; यथा: जैसे; आत्थ: आपने कहा; त्वम्: आप; आत्मानम्: अपने को; परमेश्वर: हे परमेश्वर; द्रष्टुम्: देखने की; इच्छामि: इच्छा करता हूँ; ते: आपका; रूपम्: रूप; ऐश्वरम्: दिव्य; पुरुषोत्तम: हे पुरुषोत्तम।

हिंदी अनुवाद

हे परमेश्वर! आपने अपने विषय में जैसा कहा है, वह सब सत्य है; फिर भी हे पुरुषोत्तम, मैं आपके ऐश्वर्यमय रूप को देखना चाहता हूँ।

English Translation

O Supreme Lord, as You have described Yourself, I wish to see Your divine form, O Purushottama.

टीका / Commentary

अर्जुन अब प्रत्यक्ष रूप से भगवान् के विराट रूप के दर्शन की इच्छा व्यक्त करते हैं।