विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 35

श्लोक ३५ में अर्जुन भयभीत होकर कृष्ण की स्तुति करते हैं। Verse 35: Arjuna, trembling, praises Krishna with folded hands.

संस्कृत श्लोक

सञ्जय उवाच । एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटी । नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य ॥ ३५॥

sañjaya uvāca | etac chrutvā vacanaṃ keśavasya kṛtāñjalir vepamānaḥ kirīṭī | namaskṛtvā bhūya evāha kṛṣṇaṃ sa-gadgadaṃ bhīta-bhītaḥ praṇamya ||35||

पदच्छेद / शब्दार्थ

सञ्जय: संजय; उवाच: बोले; एतत्: यह; श्रुत्वा: सुनकर; वचनम्: वचन; केशवस्य: केशव (कृष्ण) का; कृताञ्जलि: हाथ जोड़े हुए; वेपमानः: कांपता हुआ; किरीटी: मुकुटधारी (अर्जुन); नमस्कृत्वा: नमस्कार करके; भूयः: फिर; एव: ही; आह: बोला; कृष्णम्: कृष्ण से; सगद्गदम्: गद्गद स्वर में; भीतभीतः: बहुत भयभीत होकर; प्रणम्य: प्रणाम करके।

हिंदी अनुवाद

संजय बोले: हे राजन्, केशव के इन वचनों को सुनकर मुकुटधारी अर्जुन ने हाथ जोड़कर, कांपते हुए, नमस्कार किया और बहुत भयभीत होकर प्रणाम करके फिर कृष्ण से गद्गद स्वर में कहा।

English Translation

Sanjaya said: Hearing these words of Kesava, Arjuna, with folded hands, trembling, prostrated himself and, overwhelmed with fear, again spoke to Krishna in a choked voice.

टीका / Commentary

अर्जुन की भयभीत अवस्था का वर्णन।