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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 34

अध्याय 11 · श्लोक 34

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान् । मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान् ॥ ३४॥

droṇaṃ ca bhīṣmaṃ ca jayadrathaṃ ca karṇaṃ tathānyān api yodha-vīrān | mayā hatāṃs tvaṃ jahi mā vyathiṣṭhā yudhyasva jetāsi raṇe sapatnān ||34||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

द्रोणम्: द्रोण को; च: और; भीष्मम्: भीष्म को; च: और; जयद्रथम्: जयद्रथ को; च: और; कर्णम्: कर्ण को; तथा: इसी प्रकार; अन्यान्: दूसरे; अपि: भी; योधवीरान्: योद्धा वीरों को; मया: मेरे द्वारा; हतान्: मारे गए; त्वम्: तू; जहि: मार; मा: मत; व्यथिष्ठाः: व्यथित हो; युध्यस्व: युद्ध कर; जेतासि: जीतेगा; रणे: युद्ध में; सपत्नान्: शत्रुओं को।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण तथा अन्य महारथी योद्धा मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं। तू उन्हें मार, व्यथित मत हो। युद्ध कर, तू युद्ध में शत्रुओं को जीत लेगा।

English Translation

Slay Drona, Bhishma, Jayadratha, Karna, and other great warriors who are already killed by Me. Do not fear. Fight and you will conquer your enemies in battle.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् विशिष्ट योद्धाओं के नाम लेकर अर्जुन को आश्वस्त करते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।