विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 30
श्लोक ३० में भगवान् के उग्र रूप द्वारा समस्त लोकों के निगलने का वर्णन है। Verse 30: The Lord devours all worlds with His fierce mouths.
संस्कृत श्लोक
लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ताल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः । तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं भासस्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो ॥ ३०॥
lelihyase grasamānaḥ samantāl lokān samagrān vadanair jvaladbhiḥ | tejobhir āpūrya jagat samagraṃ bhāsas tavogrāḥ pratapanti viṣṇo ||30||
पदच्छेद / शब्दार्थ
लेलिह्यसे: चाट रहे हो; ग्रसमानः: निगलते हुए; समन्तात्: चारों ओर से; लोकान्: लोकों को; समग्रान्: सम्पूर्ण; वदनैः: मुखों से; ज्वलद्भिः: प्रज्वलित; तेजोभिः: तेज से; आपूर्य: भरकर; जगत्: जगत्; समग्रम्: सम्पूर्ण; भासः: किरणें; तव: आपकी; उग्राः: उग्र; प्रतपन्ति: तपा रही हैं; विष्णो: हे विष्णो।
हिंदी अनुवाद
आप अपने प्रज्वलित मुखों से चारों ओर के समस्त लोकों को चाटते हुए निगल रहे हैं। हे विष्णो, आपकी उग्र किरणें सम्पूर्ण जगत् को तेज से भरकर तपा रही हैं।
English Translation
Licking all the worlds with Your blazing mouths, You are devouring them on all sides. Your fierce rays fill the whole universe with radiance and burn it, O Vishnu.
टीका / Commentary
भगवान् के संहारक रूप का भयानक वर्णन।