विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 28

श्लोक २८ में नदियों के समुद्र में मिलने जैसा दृश्य दिखाया गया है। Verse 28: Warriors enter the Lord's mouths like rivers flowing into the ocean.

संस्कृत श्लोक

यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति । तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति ॥ २८॥

yathā nadīnāṃ bahavo 'mbhu-vegāḥ samudram evābhimukhā dravanti | tathā tavāmī nara-loka-vīrā viśanti vaktrāṇy abhivijvalanti ||28||

पदच्छेद / शब्दार्थ

यथा: जैसे; नदीनाम्: नदियों के; बहवः: अनेक; अम्बुवेगाः: जल के वेग; समुद्रम्: समुद्र; एव: ही; अभिमुखाः: सम्मुख; द्रवन्ति: दौड़ते हैं; तथा: वैसे ही; तव: आपके; अमी: ये; नरलोकवीराः: मनुष्य लोक के वीर; विशन्ति: प्रवेश कर रहे हैं; वक्त्राणि: मुखों में; अभिविज्वलन्ति: प्रज्वलित हो रहे हैं।

हिंदी अनुवाद

जैसे नदियों के अनेक जल के वेग समुद्र की ओर दौड़ते हैं, वैसे ही ये मनुष्य लोक के वीर आपके प्रज्वलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं।

English Translation

Just as many rushing rivers flow toward the ocean, so do these warriors of the human world enter Your blazing mouths.

टीका / Commentary

नदियों के समुद्र में मिलने के उदाहरण से विनाश की अनिवार्यता।