आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 28

अध्याय 11 · श्लोक 28

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति । तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति ॥ २८॥

yathā nadīnāṃ bahavo 'mbhu-vegāḥ samudram evābhimukhā dravanti | tathā tavāmī nara-loka-vīrā viśanti vaktrāṇy abhivijvalanti ||28||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यथा: जैसे; नदीनाम्: नदियों के; बहवः: अनेक; अम्बुवेगाः: जल के वेग; समुद्रम्: समुद्र; एव: ही; अभिमुखाः: सम्मुख; द्रवन्ति: दौड़ते हैं; तथा: वैसे ही; तव: आपके; अमी: ये; नरलोकवीराः: मनुष्य लोक के वीर; विशन्ति: प्रवेश कर रहे हैं; वक्त्राणि: मुखों में; अभिविज्वलन्ति: प्रज्वलित हो रहे हैं।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जैसे नदियों के अनेक जल के वेग समुद्र की ओर दौड़ते हैं, वैसे ही ये मनुष्य लोक के वीर आपके प्रज्वलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं।

English Translation

Just as many rushing rivers flow toward the ocean, so do these warriors of the human world enter Your blazing mouths.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

नदियों के समुद्र में मिलने के उदाहरण से विनाश की अनिवार्यता।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।