विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 27

श्लोक २७ में योद्धाओं के भगवान् के मुख में प्रवेश और विनाश का वर्णन है। Verse 27: Description of warriors entering the Lord's mouths and being crushed.

संस्कृत श्लोक

वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि । केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः ॥ २७॥

vaktrāṇi te tvaramāṇā viśanti daṃṣṭrā-karālāni bhayānakāni | kecid vilagnā daśanāntareṣu sandṛśyante cūrṇitair uttamāṅgaiḥ ||27||

पदच्छेद / शब्दार्थ

वक्त्राणि: मुखों में; ते: आपके; त्वरमाणाः: शीघ्रता से; विशन्ति: प्रवेश कर रहे हैं; दंष्ट्राकरालानि: दाढ़ों से विकराल; भयानकानि: भयानक; केचित्: कुछ; विलग्नाः: चिपके हुए; दशनान्तरेषु: दाँतों के बीच; सन्दृश्यन्ते: दिख रहे हैं; चूर्णितैः: चूर्ण हुए; उत्तमाङ्गैः: सिरों से।

हिंदी अनुवाद

वे सब आपके उन भयानक दाढ़ों वाले मुखों में शीघ्रता से प्रवेश कर रहे हैं। कुछ तो दाँतों के बीच चिपके हुए दिख रहे हैं और उनके सिर चूर्ण हो गए हैं।

English Translation

They are rushing into Your terrible mouths with their fearful tusks. Some are seen stuck between the teeth, their heads crushed to powder.

टीका / Commentary

भगवान् के मुख में योद्धाओं के विनाश का भयानक दृश्य।