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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 27

अध्याय 11 · श्लोक 27

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि । केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः ॥ २७॥

vaktrāṇi te tvaramāṇā viśanti daṃṣṭrā-karālāni bhayānakāni | kecid vilagnā daśanāntareṣu sandṛśyante cūrṇitair uttamāṅgaiḥ ||27||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

वक्त्राणि: मुखों में; ते: आपके; त्वरमाणाः: शीघ्रता से; विशन्ति: प्रवेश कर रहे हैं; दंष्ट्राकरालानि: दाढ़ों से विकराल; भयानकानि: भयानक; केचित्: कुछ; विलग्नाः: चिपके हुए; दशनान्तरेषु: दाँतों के बीच; सन्दृश्यन्ते: दिख रहे हैं; चूर्णितैः: चूर्ण हुए; उत्तमाङ्गैः: सिरों से।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

वे सब आपके उन भयानक दाढ़ों वाले मुखों में शीघ्रता से प्रवेश कर रहे हैं। कुछ तो दाँतों के बीच चिपके हुए दिख रहे हैं और उनके सिर चूर्ण हो गए हैं।

English Translation

They are rushing into Your terrible mouths with their fearful tusks. Some are seen stuck between the teeth, their heads crushed to powder.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् के मुख में योद्धाओं के विनाश का भयानक दृश्य।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।