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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 26

अध्याय 11 · श्लोक 26

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घैः । भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः ॥ २६॥

amī ca tvāṃ dhṛtarāṣṭrasya putrāḥ sarve sahaivāvani-pāla-saṅghaiḥ | bhīṣmo droṇaḥ sūta-putras tathāsau sahāsmadīyair api yodha-mukhyaiḥ ||26||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अमी: ये; च: और; त्वाम्: आपमें; धृतराष्ट्रस्य: धृतराष्ट्र के; पुत्राः: पुत्र; सर्वे: सभी; सह: सहित; एव: ही; अवनिपालसङ्घैः: राजाओं के समूहों के साथ; भीष्मः: भीष्म; द्रोणः: द्रोण; सूतपुत्रः: कर्ण; तथा: इसी प्रकार; असौ: वह; सह: सहित; अस्मदीयैः: हमारे; अपि: भी; योधमुख्यैः: प्रमुख योद्धाओं के साथ।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

धृतराष्ट्र के ये सभी पुत्र तथा राजाओं के समूह, भीष्म, द्रोण, कर्ण और हमारे प्रमुख योद्धा भी आपके मुखों में प्रवेश कर रहे हैं।

English Translation

All the sons of Dhritarashtra, along with hosts of kings, Bhishma, Drona, and Karna, as well as the chief warriors on our side, are rushing into Your mouths.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन देखते हैं कि युद्ध के सभी योद्धा भगवान् के मुख में समा रहे हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।