विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 23
श्लोक २३ में अर्जुन कहते हैं कि आपके विकराल रूप को देखकर मैं और सभी लोक भयभीत हैं। Verse 23: Arjuna expresses fear at the terrible form.
संस्कृत श्लोक
रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरुपादम् । बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम् ॥ २३॥
rūpaṃ mahat te bahu-vaktra-netraṃ mahābāho bahu-bāhūru-pādam | bahūdaraṃ bahu-daṃṣṭrā-karālaṃ dṛṣṭvā lokāḥ pravyathitās tathāham ||23||
पदच्छेद / शब्दार्थ
रूपम्: रूप; महत्: महान्; ते: आपका; बहुवक्त्रनेत्रम्: बहुत मुख और नेत्रों वाला; महाबाहो: हे महाबाहो; बहुबाहूरुपादम्: बहुत भुजाओं, जंघाओं और पैरों वाला; बहूदरम्: बहुत उदरों वाला; बहुदंष्ट्राकरालम्: बहुत दाढ़ों से विकराल; दृष्ट्वा: देखकर; लोकाः: लोक; प्रव्यथिताः: व्याकुल; तथा: वैसे ही; अहम्: मैं।
हिंदी अनुवाद
हे महाबाहो, आपके इस महान् रूप को, जिसमें अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक भुजाएँ, जंघाएँ और पैर हैं, अनेक उदर हैं, और अनेक दाढ़ों से विकराल है, देखकर सभी लोक व्याकुल हो रहे हैं और मैं भी व्याकुल हूँ।
English Translation
O mighty-armed one, seeing Your vast form with many mouths and eyes, with many arms, thighs, and feet, with many bellies, and terrible with many tusks, the worlds are terrified, and so am I.
टीका / Commentary
अर्जुन अपने भय को व्यक्त करते हैं।