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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 23

अध्याय 11 · श्लोक 23

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरुपादम् । बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम् ॥ २३॥

rūpaṃ mahat te bahu-vaktra-netraṃ mahābāho bahu-bāhūru-pādam | bahūdaraṃ bahu-daṃṣṭrā-karālaṃ dṛṣṭvā lokāḥ pravyathitās tathāham ||23||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

रूपम्: रूप; महत्: महान्; ते: आपका; बहुवक्त्रनेत्रम्: बहुत मुख और नेत्रों वाला; महाबाहो: हे महाबाहो; बहुबाहूरुपादम्: बहुत भुजाओं, जंघाओं और पैरों वाला; बहूदरम्: बहुत उदरों वाला; बहुदंष्ट्राकरालम्: बहुत दाढ़ों से विकराल; दृष्ट्वा: देखकर; लोकाः: लोक; प्रव्यथिताः: व्याकुल; तथा: वैसे ही; अहम्: मैं।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे महाबाहो, आपके इस महान् रूप को, जिसमें अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक भुजाएँ, जंघाएँ और पैर हैं, अनेक उदर हैं, और अनेक दाढ़ों से विकराल है, देखकर सभी लोक व्याकुल हो रहे हैं और मैं भी व्याकुल हूँ।

English Translation

O mighty-armed one, seeing Your vast form with many mouths and eyes, with many arms, thighs, and feet, with many bellies, and terrible with many tusks, the worlds are terrified, and so am I.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अपने भय को व्यक्त करते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।