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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 22

अध्याय 11 · श्लोक 22

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च । गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥ २२॥

rudrādityā vasavo ye ca sādhyā viśve 'śvinau marutaś coṣmapāś ca | gandharva-yakṣāsura-siddha-saṅghā vīkṣante tvāṃ vismitāś caiva sarve ||22||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

रुद्रादित्या: रुद्र और आदित्य; वसवः: वसु; ये: जो; च: और; साध्या: साध्य; विश्वे: विश्वेदेव; अश्विनौ: अश्विनीकुमार; मरुतः: मरुत; च: और; ऊष्मपाः: उष्मप (पितर); च: और; गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा: गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह; वीक्षन्ते: देख रहे हैं; त्वाम्: आपको; विस्मिताः: विस्मित; च: और; एव: ही; सर्वे: सभी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, मरुत्, उष्मप (पितर), तथा गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह – सभी आपको आश्चर्य से देख रहे हैं।

English Translation

The Rudras, Adityas, Vasus, Sadhyas, Vishvedevas, the two Ashvins, Maruts, Ushmapas (manes), and hosts of Gandharvas, Yakshas, Asuras, and Siddhas – all gaze at You in amazement.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

विभिन्न देवताओं और प्राणियों द्वारा विराट रूप के दर्शन।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।