विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 21
श्लोक २१ में देवता और ऋषि भयभीत होकर भगवान् की स्तुति कर रहे हैं। Verse 21: Gods and sages praise the Lord in fear.
संस्कृत श्लोक
अमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति । स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः ॥ २१॥
amī hi tvāṃ sura-saṅghā viśanti kecid bhītāḥ prāñjalayo gṛṇanti | svastīty uktvā maharṣi-siddha-saṅghāḥ stuvanti tvāṃ stutibhiḥ puṣkalābhiḥ ||21||
पदच्छेद / शब्दार्थ
अमी: ये; हि: ही; त्वाम्: आपमें; सुरसङ्घाः: देवताओं के समूह; विशन्ति: प्रवेश कर रहे हैं; केचित्: कुछ; भीताः: भयभीत; प्राञ्जलयः: हाथ जोड़े हुए; गृणन्ति: स्तुति कर रहे हैं; स्वस्ति: कल्याण हो; इति: इस प्रकार; उक्त्वा: कहकर; महर्षिसिद्धसङ्घाः: महर्षियों और सिद्धों के समूह; स्तुवन्ति: स्तुति करते हैं; त्वाम्: आपकी; स्तुतिभिः: स्तुतियों से; पुष्कलाभिः: अनेक प्रकार की।
हिंदी अनुवाद
ये देवताओं के समूह आपमें प्रवेश कर रहे हैं; कुछ भयभीत होकर हाथ जोड़कर आपकी स्तुति कर रहे हैं; तथा महर्षियों और सिद्धों के समूह "कल्याण हो" कहकर अनेक प्रकार की स्तुतियों से आपकी स्तुति करते हैं।
English Translation
Indeed, these hosts of gods enter into You; some, frightened, praise You with folded hands; and the hosts of great sages and perfected ones, saying "May all be well," sing Your praises with elaborate hymns.
टीका / Commentary
देवता और ऋषि भी विराट रूप से प्रभावित होकर उसकी स्तुति कर रहे हैं।