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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 15

अध्याय 11 · श्लोक 15

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अर्जुन उवाच । पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान् । ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान् ॥ १५॥

arjuna uvāca | paśyāmi devāṃs tava deva dehe sarvāṃs tathā bhūta-viśeṣa-saṅghān | brahmāṇam īśaṃ kamalāsana-stham ṛṣīṃś ca sarvān uragāṃś ca divyān ||15||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अर्जुन: अर्जुन; उवाच: बोले; पश्यामि: देखता हूँ; देवान्: देवताओं को; तव: आपके; देव: हे देव; देहे: शरीर में; सर्वान्: सभी; तथा: इसी प्रकार; भूतविशेषसङ्घान्: विशिष्ट प्राणियों के समूहों को; ब्रह्माणम्: ब्रह्मा को; ईशम्: शिव को; कमलासनस्थम्: कमलासन पर स्थित; ऋषीन्: ऋषियों को; च: और; सर्वान्: सभी; उरगान्: सर्पों को; च: और; दिव्यान्: दिव्य।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्जुन बोले: हे देव, मैं आपके शरीर में सभी देवताओं को तथा विविध प्राणियों के समूहों को देखता हूँ; ब्रह्मा जी को कमलासन पर स्थित देखता हूँ, तथा सभी ऋषियों और दिव्य सर्पों को देखता हूँ।

English Translation

Arjuna said: O Lord, I see in Your body all the gods and hosts of various beings, Brahma the Creator seated on the lotus, all the sages and divine serpents.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन विराट रूप में दिख रहे विभिन्न प्राणियों का वर्णन करते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।