विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 15
श्लोक १५ में अर्जुन विराट रूप में देवताओं और ऋषियों को देखते हैं। Verse 15: Arjuna sees gods and sages in the universal form.
संस्कृत श्लोक
अर्जुन उवाच । पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान् । ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान् ॥ १५॥
arjuna uvāca | paśyāmi devāṃs tava deva dehe sarvāṃs tathā bhūta-viśeṣa-saṅghān | brahmāṇam īśaṃ kamalāsana-stham ṛṣīṃś ca sarvān uragāṃś ca divyān ||15||
पदच्छेद / शब्दार्थ
अर्जुन: अर्जुन; उवाच: बोले; पश्यामि: देखता हूँ; देवान्: देवताओं को; तव: आपके; देव: हे देव; देहे: शरीर में; सर्वान्: सभी; तथा: इसी प्रकार; भूतविशेषसङ्घान्: विशिष्ट प्राणियों के समूहों को; ब्रह्माणम्: ब्रह्मा को; ईशम्: शिव को; कमलासनस्थम्: कमलासन पर स्थित; ऋषीन्: ऋषियों को; च: और; सर्वान्: सभी; उरगान्: सर्पों को; च: और; दिव्यान्: दिव्य।
हिंदी अनुवाद
अर्जुन बोले: हे देव, मैं आपके शरीर में सभी देवताओं को तथा विविध प्राणियों के समूहों को देखता हूँ; ब्रह्मा जी को कमलासन पर स्थित देखता हूँ, तथा सभी ऋषियों और दिव्य सर्पों को देखता हूँ।
English Translation
Arjuna said: O Lord, I see in Your body all the gods and hosts of various beings, Brahma the Creator seated on the lotus, all the sages and divine serpents.
टीका / Commentary
अर्जुन विराट रूप में दिख रहे विभिन्न प्राणियों का वर्णन करते हैं।