विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 14

श्लोक १४ में अर्जुन आश्चर्यचकित होकर भगवान् की स्तुति करते हैं। Verse 14: Arjuna, filled with wonder, praises the Lord.

संस्कृत श्लोक

ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः । प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत ॥ १४॥

tataḥ sa vismayāviṣṭo hṛṣṭa-romā dhanañjayaḥ | praṇamya śirasā devaṃ kṛtāñjalir abhāṣata ||14||

पदच्छेद / शब्दार्थ

ततः: तब; स: वह; विस्मयाविष्ट: आश्चर्य से युक्त; हृष्टरोमा: रोमांचित; धनञ्जय: धनंजय (अर्जुन); प्रणम्य: प्रणाम करके; शिरसा: सिर से; देवम्: देव को; कृताञ्जलि: हाथ जोड़े हुए; अभाषत: बोले।

हिंदी अनुवाद

तब आश्चर्यचकित और रोमांचित होकर धनंजय अर्जुन ने भगवान् को सिर झुकाकर प्रणाम किया और हाथ जोड़कर बोले।

English Translation

Then, struck with wonder, his hair standing on end, Arjuna bowed his head to the Lord and spoke with joined palms.

टीका / Commentary

अर्जुन की प्रतिक्रिया: आश्चर्य, रोमांच, और फिर स्तुति।