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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 16

अध्याय 10 · श्लोक 16

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः | याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि || १६||

vaktum arhasyaśeṣeṇa divyā hy ātma-vibhūtayaḥ | yābhir vibhūtibhir lokān imāṃs tvaṃ vyāpya tiṣṭhasi ||16||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

वक्तुम्: कहने के लिए; अर्हसि: आप योग्य हैं; अशेषेण: सम्पूर्ण रूप से; दिव्या: दिव्य; हि: ही; आत्म-विभूतय: अपनी विभूतियाँ; याभि: जिनसे; विभूतिभि: विभूतियों से; लोकान्: लोकों को; इमान्: इन; त्वम्: आप; व्याप्य: व्याप्त करके; तिष्ठसि: स्थित हैं।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

आप सम्पूर्ण रूप से अपनी उन दिव्य विभूतियों को कहने की कृपा करें, जिन विभूतियों से आप इन सब लोकों को व्याप्त करके स्थित हैं।

English Translation

You should indeed tell me without reserve of Your divine glories by which You exist, pervading all these worlds.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Arjuna humbly requests Krishna to elaborate on His divine manifestations. Since only Krishna truly knows Himself, Arjuna asks Him to reveal these glories. This request sets the stage for the接下来的 enumeration of Krishna's divine opulences.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।