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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 46

अध्याय 1 · श्लोक 46

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः | धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् ||४६||

yadi māmapratīkāram aśastraṃ śastrapāṇayaḥ | dhārtarāṣṭrā raṇe hanyustanme kṣemataraṃ bhavet ||46||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यदि: यदि; माम्: मुझे; अप्रतीकारम्: बिना प्रतिकार किए; अशस्त्रम्: शस्त्र रहित; शस्त्रपाणयः: हाथ में शस्त्र लिए; धार्तराष्ट्राः: धृतराष्ट्र के पुत्र; रणे: युद्ध में; हन्युः: मार डालें; तत्: वह; मे: मेरे लिए; क्षेमतरम्: अधिक कल्याणकारी; भवेत्: होगा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यदि धृतराष्ट्र के पुत्र हाथ में शस्त्र लिए युद्ध में मुझे बिना प्रतिकार किए और शस्त्र रहित मार डालें, तो वह मेरे लिए अधिक कल्याणकारी होगा।

English Translation

If the sons of Dhritarashtra, with weapons in hand, kill me in battle while I am unarmed and not offering resistance, that would be better for me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अब युद्ध से पूरी तरह विमुख होकर यह भी कहते हैं कि उनका मारा जाना ही भला है, बजाय इसके कि वे अपनों को मारें। Arjuna now says that being killed unarmed is better than killing his own kinsmen.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।