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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 47

अध्याय 1 · श्लोक 47

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

एवमुक्त्वार्जुनः सङ्ख्ये रथोपस्थ उपाविशत् | विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः ||४७||

evamuktvārjunaḥ saṅkhye rathopastha upāviśat | visṛjya saśaraṃ cāpaṃ śokasaṃvignamānasaḥ ||47||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

एवम्: इस प्रकार; उक्त्वा: कहकर; अर्जुनः: अर्जुन; सङ्ख्ये: युद्ध में; रथोपस्थे: रथ के पिछले भाग में; उपाविशत्: बैठ गए; विसृज्य: त्यागकर; सशरम्: बाणों सहित; चापम्: धनुष; शोक: शोक से; संविग्न: व्याकुल; मानसः: मन वाले।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

युद्धभूमि में इस प्रकार कहकर अर्जुन ने बाणों सहित धनुष त्याग दिया और शोक से व्याकुल मन से रथ के पिछले भाग में बैठ गए।

English Translation

Speaking thus, Arjuna cast aside his bow and arrows and sat down on the chariot, his mind overwhelmed with sorrow.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन ने युद्ध न करने का निश्चय कर लिया और धनुष-बाण त्यागकर रथ में बैठ गए। Arjuna finally decides not to fight, lays down his weapons, and sits in the chariot.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।