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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 31

अध्याय 1 · श्लोक 31

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव | न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ||३१||

nimittāni ca paśyāmi viparītāni keśava | na ca śreyo'nupaśyāmi hatvā svajanamāh ave ||31||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

निमित्तानि: लक्षण; च: और; पश्यामि: देखता हूँ; विपरीतानि: विपरीत; केशव: हे केशव (कृष्ण); न: नहीं; च: और; श्रेयः: कल्याण; अनुपश्यामि: देखता हूँ; हत्वा: मारकर; स्वजनम्: स्वजनों को; आहवे: युद्ध में।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे केशव! मैं विपरीत (अशुभ) लक्षण देख रहा हूँ और युद्ध में अपने स्वजनों को मारकर मुझे कल्याण नहीं दिखता।

English Translation

I see inauspicious omens, O Keshava. I do not foresee any good in killing my own kinsmen in this battle.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अशुभ शकुन देखते हैं और सोचते हैं कि अपनों को मारने से कोई कल्याण नहीं होगा। Arjuna sees bad omens and thinks that no good can come from killing one's own people.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।