कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – श्लोक 1
श्लोक १ में अर्जुन कृष्ण से पूछते हैं कि कर्म-त्याग और कर्मयोग में से कौन-सा मार्ग श्रेष्ठ है।
संस्कृत श्लोक
अर्जुन उवाच संन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ॥ १॥
arjuna uvāca sannyāsaṃ karmaṇāṃ kṛṣṇa punar-yogaṃ ca śaṃsasi | yac-chreya etayor ekaṃ tan-me brūhi suniścitam ||1||
पदच्छेद / शब्दार्थ
अर्जुन: अर्जुन; उवाच: बोले; संन्यासम्: त्याग; कर्मणाम्: कर्मों का; कृष्ण: हे कृष्ण; पुनः: फिर; योगम्: (कर्म)योग; च: और; शंससि: आप प्रशंसा करते हैं; यत्: जो; श्रेय: कल्याणकारी; एतयोः: इन दोनों में से; एकम्: एक; तत्: वह; मे: मुझे; ब्रूहि: कहिए; सुनिश्चितम्: निश्चयपूर्वक।
हिंदी अनुवाद
अर्जुन बोले: हे कृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की और फिर कर्मयोग की भी प्रशंसा करते हैं। इन दोनों में से जो एक निश्चित रूप से कल्याणकारी हो, वह मुझे बताइए।
English Translation
Arjuna said: O Krishna, you praise renunciation of actions (sannyasa) and also yoga (performance of action). Tell me conclusively which one is better.
टीका / Commentary
यह श्लोक अर्जुन की जिज्ञासा को दर्शाता है। पिछले अध्यायों में कृष्ण ने कर्मयोग और सांख्ययोग (ज्ञान) दोनों की चर्चा की थी। अब अर्जुन स्पष्टता चाहते हैं।