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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 1

अध्याय 2 · श्लोक 1

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥ १॥

taṃ tathā kṛpayāviṣṭam aśru-pūrṇākulekṣaṇam | viṣīdantam idaṃ vākyam uvāca madhusūdanaḥ ||1||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तम्: उसे; तथा: इस प्रकार; कृपया: दया से; आविष्टम्: व्याप्त; अश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्: आँसुओं से भरे और व्याकुल नेत्रों वाले; विषीदन्तम्: शोक करते हुए; इदम्: यह; वाक्यम्: वचन; उवाच: बोले; मधुसूदन: मधुसूदन (कृष्ण)।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तब मधुसूदन ने उस (अर्जुन) को, जो इस प्रकार दया से व्याकुल, आँसुओं से भरे हुए अशान्त नेत्रों वाला और शोक करता हुआ था, इस प्रकार वचन कहे।

English Translation

To him who was thus overcome with compassion and grief, and whose eyes were full of tears and troubled, Madhusudana (Krishna) spoke these words.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक अर्जुन की दयनीय स्थिति का चित्रण करता है। वह पूर्णतः भावुक हो चुके हैं। "मधुसूदन" नाम विशेष रूप से प्रयुक्त हुआ है – मधु नामक राक्षस का संहार करने वाला, जो दर्शाता है कि कृष्ण अब अर्जुन के अज्ञान रूपी राक्षस का नाश करेंगे।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।