सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 1
श्लोक १ में कृष्ण अर्जुन के शोक को देखकर उन्हें उपदेश देने आरम्भ करते हैं। Verse 1: Krishna begins to teach Arjuna, who is overwhelmed with pity.
संस्कृत श्लोक
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥ १॥
taṃ tathā kṛpayāviṣṭam aśru-pūrṇākulekṣaṇam | viṣīdantam idaṃ vākyam uvāca madhusūdanaḥ ||1||
पदच्छेद / शब्दार्थ
तम्: उसे; तथा: इस प्रकार; कृपया: दया से; आविष्टम्: व्याप्त; अश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्: आँसुओं से भरे और व्याकुल नेत्रों वाले; विषीदन्तम्: शोक करते हुए; इदम्: यह; वाक्यम्: वचन; उवाच: बोले; मधुसूदन: मधुसूदन (कृष्ण)।
हिंदी अनुवाद
तब मधुसूदन ने उस (अर्जुन) को, जो इस प्रकार दया से व्याकुल, आँसुओं से भरे हुए अशान्त नेत्रों वाला और शोक करता हुआ था, इस प्रकार वचन कहे।
English Translation
To him who was thus overcome with compassion and grief, and whose eyes were full of tears and troubled, Madhusudana (Krishna) spoke these words.
टीका / Commentary
यह श्लोक अर्जुन की दयनीय स्थिति का चित्रण करता है। वह पूर्णतः भावुक हो चुके हैं। "मधुसूदन" नाम विशेष रूप से प्रयुक्त हुआ है – मधु नामक राक्षस का संहार करने वाला, जो दर्शाता है कि कृष्ण अब अर्जुन के अज्ञान रूपी राक्षस का नाश करेंगे।