दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) – श्लोक 24

श्लोक २४ में कहा गया कि कर्तव्य-अकर्तव्य के निर्णय में शास्त्र ही प्रमाण है, अतः शास्त्रानुसार कर्म करो।

संस्कृत श्लोक

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ | ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि || २४||

tasmāc chāstraṃ pramāṇaṃ te kāryākārya-vyavasthitau | jñātvā śāstra-vidhānoktaṃ karma kartum ihārhasi ||24||

पदच्छेद / शब्दार्थ

तस्मात्: इसलिए; शास्त्रम्: शास्त्र; प्रमाणम्: प्रमाण; ते: तेरे लिए; कार्याकार्यव्यवस्थितौ: कर्तव्य और अकर्तव्य के निर्णय में; ज्ञात्वा: जानकर; शास्त्रविधानोक्तम्: शास्त्रविधि से कहे हुए; कर्म: कर्म; कर्तुम्: करने के लिए; इह: इस लोक में; अर्हसि: तू योग्य है।

हिंदी अनुवाद

इसलिए कर्तव्य और अकर्तव्य के निर्णय में शास्त्र ही तेरा प्रमाण है। शास्त्रविधि द्वारा कहे हुए कर्म को जानकर ही तू यहाँ (इस लोक में) करने योग्य है।

English Translation

Therefore, let the scriptures be your authority in determining what should be done and what should not be done. You should perform actions in this world knowing what has been enjoined by the scriptures.

टीका / Commentary

यह अध्याय का समापन श्लोक है। भगवान अर्जुन को शास्त्र को प्रमाण मानने का निर्देश देते हैं। शास्त्र ही बताते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इसलिए शास्त्रानुसार कर्म करना ही उचित है।