Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले भजन लिरिक्स (Itna Toh Karna Swami Jab Pran Tan Se Nikle Lyrics in Hindi) - Chetna Shukla

इस भजन में स्वामी के प्रति अंतिम समय में श्रद्धा और समर्पण की भावना को व्यक्त किया गया है, जो भक्त की आत्मिक यात्रा को सहज बनाता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

स्वामी के चरणों में अंतिम निवेदन

यह भजन जीवन के अंतिम क्षणों में स्वामी के प्रति समर्पण और भक्ति व्यक्त करता है।

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले, मैं हस्त जोड़ूं तेरा नाम लूँ, जैसे भी हो तेरा दास हूँ। हाथ में जैसे तेरा नाम हो, बस तेरे ही नाम से निकले। शरण में आऊं, तेरा ध्यान करूं, जैसे भी हो तेरा दास हूँ। इतने में ही सच्चा मेरा जीवन, तेरा साया हो तो कष्ट भुला दूं। मेरे दिल में तेरा नाम हो, जैसे भी हो तेरा दास हूँ। मोक्ष की राह पर ले चल मुझको, जैसे भी हो तेरा दास हूँ। तबीयत किसी की भी हो, जैसे भी हो तेरा दास हूँ। तेरा ही नाम लूँ तेरे ही लोक में जाऊं, जैसे भी हो तेरा दास हूँ।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में मुख्य विषय स्वामी के प्रति समर्पण और निवेदन है। जब प्राण शरीर से निकलते हैं, तब भक्ति और श्रद्धा का सच्चा अर्थ समझ में आता है। 'इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले' का भाव इस ओर संकेत करता है कि आत्मिक यात्रा के अंतिम क्षणों में भी भगवान का नाम लेना और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करना हो। यह हमें याद दिलाता है कि देहावसान के समय किसी भी स्थिति में प्रभु का नाम महत्वपूर्ण है। भक्ति का मार्ग कभी समाप्त नहीं होता, जब तक हम स्वामी को समर्पित हैं।

भावार्थ की बात करें तो यह भजन मनुष्य के अंतर्मन की गहराई को छूता है। शरण में जाकर प्रार्थना करना, 'हाथ में जैसे तेरा नाम हो' इस पंक्ति में यह बताया गया है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान का नाम लेना चाहिए। इस भजन में प्रकट किए गए संवेदनाएँ हृदय की गहराई से निकलती हैं। जब हम स्वामी की शरण जाते हैं, तब मन की बहुत सी व्याधियाँ और चिंता दूर हो जाती हैं। यह जीवन का महत्व समझाने के साथ-साथ हमारा उद्देश्य बताता है कि स्वामी के चरणों में अंतिम समय में भी अटूट विश्वास होना चाहिए।

भक्ति मार्ग का दर्शन इस भजन में स्पष्ट रूप से प्रकट होता है। यह हमें सिखाता है कि हमारे सभी कार्य भगवान के नाम से होने चाहिए और हमें हमेशा भगवान के प्रति अपनी भक्ति बनाए रखनी चाहिए। 'मोक्ष की राह पर ले चल मुझको' वाला संदेश हमें यह प्रेरणा देता है कि भक्ति कितनी भी कठिन हो, वह मोक्ष की ओर ले जाती है। इस भजन की गहराई में जाकर एक साधक समझता है कि जब तक वह भगवान की शरण में है, तब तक वह हर एक संकट से उबर सकता है। भक्ति और समर्पण का यह उदाहरण हमें एकाग्रता और विश्वास की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति के आदर्शों और धार्मिकता को उजागर करता है। पुराणों और उपनिषदों में इस प्रकार की भक्ति प्रथाओं का महत्व बताया गया है। भगवद गीता में हमें भगवान श्री कृष्ण भी परमात्मा की शरण में जाने हेतु प्रेरित करते हैं। ऐसे में यह भजन उस मार्ग का अनुसरण करते हुए, अंतिम क्षणों में मानसिक शांति और मोक्ष का संदेश देता है। भक्तों के लिए यह प्रार्थना उनकी आध्यात्मिक यात्रा को और अधिक उत्कर्षित करने में सहायक है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक शांति और आंतरिक संतोष प्राप्त होता है। यह उच्च आत्मा से जुड़ने का मार्ग प्रशस्त करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है। भजन के माध्यम से निरंतर भगवान के नाम का स्मरण करना, व्यक्ति को मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना शुभ माना जाता है। भजन गाते समय एक दीपक जलाना और स्वामी के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करना महत्वपूर्ण है। साधक को साधना के दौरान शांतिपूर्वक बैठकर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि भावनाएँ स्वत्व में समाहित हो सकें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन में जीवन के अंतिम क्षणों में भगवान के प्रति समर्पण की भावना को व्यक्त किया गया है। यह आत्मिक यात्रा को दर्शाता है।

इस भजन को गाने का सही समय कब है?

सुबह या शाम को इस भजन का जप करना सबसे शुभ होता है, जिससे भक्त का ध्यान सहजता से भगवान की ओर केंद्रित हो सके।

भजन के जप करने से क्या लाभ होते हैं?

भजन के जप से मानसिक शांति, आंतरिक संतोष और भगवान से जुड़ाव की अनुभूति होती है। यह जीवन की कठिनाइयों में संजीवनी प्रदान करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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