Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ज़रा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों भजन लिरिक्स (Jara Itna Bata De Kanha Tera Rang Kala Kyo Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan Mridul Krishna Shastri Ji

कृष्ण के रंग और उनके प्रति प्रेम की बुनियाद पर आधारित, यह भजन आस्था और भक्ति का अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

कृष्ण की अद्भुत रंगों की महिमा

कान्हा के रंग और रूप की लीला में खो जाने के लिए इस भजन का पाठ करें।

ज़रा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों कान्हा तेरा रंग काला क्यों चन्दन से महका तेरा रूप सारा क्यों कान्हा तेरा रंग काला क्यों कान्हा तेरे नैनों में एक जादू है तेरे नैनों में जादू है सारा क्यों कान्हा तेरा रंग काला क्यों तेरा मयूर पंखा झूलता है हर ओर तेरा नाम गूंजता है कान्हा तेरा रंग काला क्यों तेरी मुरली की मीठी तान सुनके हर जीव पागल है सारा क्यों कान्हा तेरा रंग काला क्यों तेरे संग जो बसा हो प्रेम का सागर उसका दिल है हरदिल का सारा क्यों कान्हा तेरा रंग काला क्यों तू ही है जीवन, तू ही है माया तेरे बिना किसका क्या है सारा क्यों कान्हा तेरा रंग काला क्यों
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'ज़रा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों' में कवि ने श्री कृष्ण के रंग के प्रति जिज्ञासा प्रकट की है। भक्त श्री कृष्ण से पूछते हैं कि ऐसा क्या विशेष है, कि उनका रंग काला होने पर भी वे सभी के ह्रदय में बसे हुए हैं। यह संकेत करता है कि रूप-रंग से परे, कृष्ण का व्यक्तित्व और उनका गुण ही उन्हें आकर्षक बनाता है। इस भजन में "चन्दन से महका तेरा रूप सारा क्यों" के माध्यम से भक्त कृष्ण का यशोगान करते हैं, यह बताता है कि कृष्ण की महिमा और उनकी गुणों की खुशबू पूरे ब्रह्मांड में बिखरी हुई है। इस गाने के माध्यम से भक्त अपने मन में उठने वाले कई प्रश्नों का उत्तर नहीं केवल कृष्ण से मांगता है, बल्कि उनके प्रति प्रेम और भक्ति की भावना को भी जगाता है।

इस भजन में भावपूर्ण प्रश्न हैं जो सीधे भक्त का ह्रदय छू लेते हैं। जब भक्त पूछते हैं 'कान्हा तेरे नैनों में एक जादू है', तो वे दरअसल यह उद्घाटन कर रहे हैं कि कृष्ण के नैनों में एक अद्वितीय रूप की शक्ति है, जो सबको सम्मोहित करती है। इसका संकेत भक्ति का गहरा अर्थ है, जहाँ कृष्ण के प्रति समर्पण और प्रेम भक्त के जीवन में आनंद और शांति लाता है। 'तेरी मुरली की मीठी तान सुनके', यहाँ मुरली का जिक्र गरेर भक्त गीत में स्वर्णकाल की मिठास का अनुभव कराता है, जिससे भक्त का मन प्रेम में स्थिर और साक्षात्कार करता है। इस प्रसंग में भक्त का संतोष और आनंद कृष्ण के पूजन में समाप्त होता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराई और भगवान के प्रति प्रेम का वर्णन किया गया है। 'तेरे संग जो बसा हो प्रेम का सागर', यह पंक्ति भक्ति का सर्वोच्च स्तर बताती है, जहाँ भक्त अपने आप को लीन करके कृष्ण के प्रेम में समर्पित कर देता है। यहाँ रंग काले का अर्थ योग्यता और निम्नता से परे जाने का है। कृष्ण रंग से परे है; वे प्रत्येक आत्मा, प्रत्येक भक्त के भीतर निवास करते हैं। इस प्रकार, भजन दर्शाता है कि भक्त केवल बाहरी रूप रंग से प्रभावित न होकर, कृष्ण के आंतरिक गुणों और दिव्यता को समझें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

कृष्ण के काले रंग की महिमा और उनके प्रति प्रेम की गहराई को दर्शाने वाले इस भजन का ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ बहुत महत्वपूर्ण है। पुराणों के अनुसार, श्री कृष्ण का काला रंग उन्हें अद्वितीय बनाता है और उनके जीवन की विविध लीलाएं, जैसे कि गोवर्धन पूजा, राधा-कृष्ण प्रेम कथा, महाभारत में उनकी भूमिका आदि, भक्तों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त श्री कृष्ण से न केवल प्रेम प्रकट करते हैं, बल्कि उनकी दिव्यता का अनुभव भी करते हैं। दुग्ध समानता की पारंपरिक धारणा में काले रंग को शक्ति और छाया के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जो शुद्धता का संकेत है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का पाठ करने से मन-मस्तिष्क को शांति मिलती है। भक्तों का ध्यान श्री कृष्ण की प्रेमिल लीला में प्रभावी रूप से लगाया जाता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है। इससे आध्यात्मिक स्थिरता आती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। नियमित रूप से इस भजन का गुंजान करने से भक्ति की भावना में वृद्धि होती है, और भक्त अपने जीवन में साहस और धैर्य का अनुभव करते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ प्रातः काल या संध्या समय में किया जाना सबसे उपयुक्त है। भक्तों को चाहिए कि वे पूजा स्थान को साफ करें, एक दीया जलाएँ और भगवान श्री कृष्ण की तस्वीर के सामने बैठकर इस भजन का पाठ करें। ध्यान करते समय भक्त को मन में भगवान के प्रति श्रद्धा और प्रेम का भाव लाना चाहिए। सुखद आसन में बैठकर, गहरी सांसें लेते हुए ह्रदय की गहराई से कृष्ण का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन को केवल काले रंग का संदर्भ ही मनाया जाता है?

नहीं, यह भजन कृष्ण के गुणों और लीला के प्रति समर्पित है, न कि केवल उनके रंग पर। यह उनकी महानता और प्रेम की मूरत को दर्शाता है।

क्या एक व्यक्ति अकेले इस भजन का पाठ कर सकता है?

बिल्कुल! व्यक्तिगत साधना में भी इस भजन का पाठ किया जा सकता है, इससे भक्त को ध्यान और शांति मिलती है।

क्या इस भजन के विशेष अवसर हैं?

यह भजन विशेष रूप से कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, और भक्ति सद्भाव के अवसरों पर गाया जाता है, परंतु इसे किसी भी समय गाया जा सकता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!