रामायण के लिए दिव्य मार्गदर्शन – श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
रामायणमिदं काव्यं पठन् स्वर्गमवाप्नुयात् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान् धनार्थी लभते धनम् ॥
हिंदी अनुवाद
इस रामायण काव्य को पढ़ने वाला स्वर्ग को प्राप्त होता है। पुत्र की इच्छा रखने वाले को पुत्र मिलते हैं और धन की इच्छा रखने वाले को धन मिलता है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण पाठ से स्वर्ग की प्राप्ति तथा पुत्र और धन की इच्छाओं की पूर्ति होती है।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के पाठ के विभिन्न फलों का वर्णन करता है। सामान्यतः पाठ करने वाला स्वर्ग प्राप्त करता है। विशेष रूप से, पुत्रेच्छु को पुत्र, धनेच्छु को धन प्राप्त होता है। यह रामायण की सर्वकामनापूर्ति क्षमता को दर्शाता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग २ – श्लोक ३८ ॥
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् धनार्थी लभते धनम् ॥
putrārthī labhate putrān dhanārthī labhate dhanam ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : इस रामायण काव्य को पढ़ने वाला स्वर्ग को प्राप्त होता है। पुत्र की इच्छा रखने वाले को पुत्र मिलते हैं और धन की इच्छा रखने वाले को धन मिलता है।
🔹 English Translation : One who reads this Ramayana poetry attains heaven. One desiring sons obtains sons; one desiring wealth obtains wealth.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| रामायणम् | संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | रामायण को |
| इदम् | सर्वनाम, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | इस |
| काव्यम् | संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | काव्य को |
| पठन् | वर्तमान कृदंत, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | पढ़ता हुआ |
| स्वर्गम् | संज्ञा, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | स्वर्ग को |
| अवाप्नुयात् | क्रिया, विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (अव + आप् धातु) | प्राप्त करे |
| पुत्रार्थी | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | पुत्र की इच्छा रखने वाला |
| लभते | क्रिया, लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (लभ् धातु) | प्राप्त करता है |
| पुत्रान् | संज्ञा, पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचन | पुत्रों को |
| धनार्थी | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | धन की इच्छा रखने वाला |
| लभते | क्रिया, लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन | प्राप्त करता है |
| धनम् | संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | धन |
📖 विशेष अर्थ एवं टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के पाठ से होने वाले भौतिक और आध्यात्मिक लाभों को स्पष्ट करता है। "स्वर्गम्" – यहाँ स्वर्ग का अर्थ है दिव्य लोक या उच्च आध्यात्मिक स्थिति। साथ ही, पुत्र और धन की कामना भी पूर्ण होती है – यह दर्शाता है कि रामायण सभी प्रकार की इच्छाओं को शुद्ध रूप में पूर्ण करने वाली है।