संस्कृत श्लोक

मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः । यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम् ॥

हिंदी अनुवाद

हे निषाद ! तूने काम के वशीभूत होकर क्रौञ्चियों के जोड़े में से एक का वध किया है, इसलिए तू अनन्त कालों तक प्रतिष्ठा को प्राप्त न हो।

अर्थ / व्याख्या

यह रामायण का प्रथम श्लोक (आदिश्लोक) है, जो महर्षि वाल्मीकि के मुख से निकला। यहाँ उन्होंने निषाद को शाप दिया कि वह कभी प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं करेगा। यही श्लोक आगे चलकर सम्पूर्ण रामायण की रचना का मूल बना।

टिप्पणी

यह श्लोक संस्कृत साहित्य का आदिश्लोक माना जाता है। इसे ही आधार मानकर वाल्मीकि ने रामायण की रचना की। इसमें अनुष्टुप् छंद है। 'शोकः श्लोकत्वमागतः' – शोक ही श्लोक में परिणत हुआ।

॥ बालकाण्ड सर्ग २ श्लोक १५ – आदिश्लोक (मा निषाद) ॥

मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः ।
यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम् ॥
mā niṣāda pratiṣṭhāṃ tvamagamaḥ śāśvatīḥ samāḥ |
yat krauñcamithunād ekam avadhīḥ kāmamohitam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : हे निषाद ! तूने काम के वशीभूत होकर क्रौञ्चियों के जोड़े में से एक का वध किया है, इसलिए तू अनन्त कालों तक प्रतिष्ठा को प्राप्त न हो।

🔹 English Translation : O Nishada (hunter)! You killed one of the Krauncha birds that were deeply in love, therefore you shall never attain fame and will wander for endless years.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतहिन्दी अर्थ
मानहीं
निषादहे निषाद (शिकारी)
प्रतिष्ठाम्प्रतिष्ठा, स्थिरता
त्वम्तू
अगमःप्राप्त करेगा
शाश्वतीःशाश्वत, अनंत काल तक रहने वाली
समाःवर्ष
यत्क्योंकि
क्रौञ्चमिथुनात्क्रौंच पक्षियों के जोड़े में से
एकम्एक को
अवधीःमार डाला
काममोहितम्काम (प्रेम) से मोहित

📖 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक सम्पूर्ण संस्कृत साहित्य का आदि (प्रथम) श्लोक माना जाता है। इसीलिए महर्षि वाल्मीकि को 'आदिकवि' कहा जाता है। कथा के अनुसार, निषाद द्वारा क्रौंच नर के वध के बाद वाल्मीकि के मुख से स्वतः ही यह श्लोक निकल पड़ा। बाद में ब्रह्मा जी ने उन्हें इसी छंद में रामचरित का वर्णन करने का आदेश दिया। इस प्रकार २४,००० श्लोकों के रामायण की रचना हुई।

इस श्लोक में अनुष्टुप् छंद है (प्रत्येक पाद में आठ अक्षर)। यह करुण रस का उद्गार है। 'शोकः श्लोकत्वमागतः' – शोक ही श्लोक में परिणत हुआ।

✨ विशेष तथ्य: इस श्लोक में ३२ अक्षर हैं, और प्रत्येक अक्षर से एक हज़ार श्लोक प्रेरित हुए, इस प्रकार २४,००० श्लोकों की रामायण बनी। यह श्लोक अहिंसा, करुणा और धर्म का संदेश देता है।

॥ जय श्री राम ॥