रामायण के लिए दिव्य मार्गदर्शन – श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
ततः करुणवेदित्वादधर्मोऽयमिति द्विजः । निशाम्य रुदतीं क्रौञ्चीमिदं वचनमब्रवीत् ॥
हिंदी अनुवाद
उस समय करुणा से आर्त होकर उन द्विज ने 'यह अधर्म है' ऐसा सोचते हुए उस रोती हुई क्रौञ्ची के विषय में यह वचन कहा।
अर्थ / व्याख्या
इस श्लोक में वाल्मीकि न केवल करुणा से भर जाते हैं, बल्कि वे यह भी अनुभव करते हैं कि यह घटना अधर्म है। वे मादा क्रौंच के रुदन को सुनते हैं और फिर अपने मुख से वचन कहते हैं, जो आगे चलकर आदिश्लोक बनता है।
टिप्पणी
यहाँ 'करुणवेदित्वात्' का अर्थ है 'करुणा से आर्त होने के कारण'। 'वेदित्व' का तात्पर्य अनुभव करने की अवस्था से है। वाल्मीकि न केवल देखते हैं, बल्कि उस पीड़ा को गहराई से अनुभव भी करते हैं। साथ ही उनके मन में यह विचार उठता है कि 'अयम् अधर्मः' – यह अधर्म है। यह उनके धर्मज्ञ होने का प्रमाण है। फिर वे रुदती क्रौंची को देखते हुए वचन कहते हैं।
॥ बालकाण्ड सर्ग २ श्लोक १४ – अधर्म का बोध ॥
निशाम्य रुदतीं क्रौञ्चीमिदं वचनमब्रवीत् ॥
niśāmya rudatīṃ krauñcīmidaṃ vacanamabravīt ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : उस समय करुणा से आर्त होकर उन द्विज ने 'यह अधर्म है' ऐसा सोचते हुए उस रोती हुई क्रौञ्ची के विषय में यह वचन कहा।
🔹 English Translation : Then, overcome with compassion, that twice-born sage, reflecting that this is adharma (unrighteous), spoke these words regarding the weeping female krauncha.
🔍 शब्दार्थ
| संस्कृत | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| ततः | तब |
| करुणवेदित्वात् | करुणा से आर्त होने के कारण |
| अधर्मः | अधर्म |
| अयम् | यह |
| इति | इस प्रकार |
| द्विजः | द्विज (ऋषि) |
| निशाम्य | सोचकर/विचार कर |
| रुदतीम् | रोती हुई |
| क्रौञ्चीम् | क्रौंची (मादा क्रौंच) को |
| इदम् | यह |
| वचनम् | वचन |
| अब्रवीत् | बोले |
📖 व्याख्या
इस श्लोक में दो महत्वपूर्ण बातें हैं – पहली, वाल्मीकि की करुणा (करुणवेदित्व) और दूसरी, उनका धर्मबोध (अधर्मः अयम्)। करुणा से आर्त होने के बावजूद वे भावुकता में नहीं बह जाते, बल्कि तर्कपूर्वक विचार करते हैं कि यह अधर्म है। इस प्रकार उनके वचन में करुणा और धर्म दोनों का समावेश है। यही वचन आगे चलकर शाप के रूप में प्रकट होता है – 'मा निषाद प्रतिष्ठाम्...'।
'निशाम्य' का अर्थ है सोचना या विचार करना। वे केवल देख ही नहीं रहे हैं, बल्कि गहराई से चिंतन भी कर रहे हैं। 'रुदतीं क्रौञ्चीम्' – रोती हुई मादा क्रौंच को देखकर उनका हृदय और अधिक द्रवित हो जाता है।
॥ जय श्री राम ॥