संस्कृत श्लोक

तस्यैवं ब्रुवतश्चिन्ता बभूव हृदि वीक्ष्यतः । शोकार्तेनास्य शकुनेः किमिदं व्याहृतं मया ॥

हिंदी अनुवाद

उनके इस प्रकार कहने पर और उस शोकाकुल पक्षी को देखकर उनके हृदय में चिन्ता उत्पन्न हुई - मैंने शोक से आर्त होकर क्या कह दिया?

अर्थ / व्याख्या

श्लोक कहने के तुरंत बाद वाल्मीकि को आश्चर्य होता है कि उनके मुख से यह वाक्य कैसे निकल गया। वे स्वयं उस श्लोक की रचना पर विस्मित हैं और चिंतन करते हैं।

टिप्पणी

यहाँ वाल्मीकि को अपने उच्चारण पर आश्चर्य होता है। वे सोचते हैं कि उन्होंने शोकवश क्या कह दिया। यह उनके कवि-हृदय की पहली अभिव्यक्ति है, जो स्वतःस्फूर्त है, और वे उसकी महत्ता को नहीं समझ पा रहे हैं।

॥ बालकाण्ड सर्ग २ श्लोक १६ – आत्म-चिन्तन ॥

तस्यैवं ब्रुवतश्चिन्ता बभूव हृदि वीक्ष्यतः ।
शोकार्तेनास्य शकुनेः किमिदं व्याहृतं मया ॥
tasyaivaṃ bruvataścintā babhūva hṛdi vīkṣyataḥ |
śokārtenāsya śakuneḥ kimidaṃ vyāhṛtaṃ mayā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उनके इस प्रकार कहने पर और उस शोकाकुल पक्षी को देखकर उनके हृदय में चिन्ता उत्पन्न हुई - मैंने शोक से आर्त होकर क्या कह दिया?

🔹 English Translation : While he was speaking thus, and looking at that sorrow-stricken bird, a thought arose in his heart: "What have I uttered, overcome with grief for this bird?"

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतहिन्दी अर्थ
तस्यउसके
एवम्इस प्रकार
ब्रुवतःकहते हुए
चिन्ताचिन्ता
बभूवहुई
हृदिहृदय में
वीक्ष्यतःदेखते हुए
शोकार्तेनशोक से आर्त होकर
अस्यइस
शकुनेःपक्षी के लिए
किम्क्या
इदम्यह
व्याहृतम्कहा गया
मयामेरे द्वारा

📖 व्याख्या

आदिश्लोक का उच्चारण करने के तुरंत बाद वाल्मीकि को अपने कथन पर आश्चर्य होता है। वे सोचते हैं – यह मैंने क्या कह दिया? उन्हें इस वाक्य की असामान्यता का आभास होता है। यह एक कवि के मन में उठने वाली पहली झंकार है, जो बताती है कि उनका हृदय अब काव्य-रचना के लिए तैयार हो गया है। 'शोकार्तेन' – शोक से आर्त होकर – यह उनकी मानसिक दशा को दर्शाता है, और 'अस्य शकुनेः' – इस पक्षी के लिए – वह करुणा का विषय है।

यह चिन्ता ही आगे चलकर उन्हें ब्रह्मा के दर्शन और रामायण रचना की प्रेरणा देगी।

📌 व्याकरण: 'तस्य ब्रुवतः' – षष्ठी का प्रयोग कर्ता के स्थान पर (सती सप्तमी के समान)। 'वीक्ष्यतः' भी षष्ठी। 'व्याहृतम्' – क्त प्रत्यय, नपुंसकलिंग।

॥ जय श्री राम ॥