संस्कृत श्लोक

रामस्य चरितं सर्वं कृतवान् भुवि विश्रुतम् । लोके रामायणं चैतत्काव्यं वाल्मीकिना कृतम् ॥

हिंदी अनुवाद

उन्होंने राम के सम्पूर्ण, पृथ्वी पर प्रसिद्ध चरित्र का वर्णन किया और इस प्रकार यह रामायण काव्य वाल्मीकि द्वारा रचा गया।

अर्थ / व्याख्या

वाल्मीकि ने राम के सम्पूर्ण प्रसिद्ध चरित्र का वर्णन कर रामायण काव्य की रचना की।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण की रचना के सम्पन्न होने की पुष्टि करता है। "भुवि विश्रुतम्" कहकर राम के चरित्र की पृथ्वी पर व्याप्त प्रसिद्धि की ओर इशारा किया गया है। "लोके" शब्द से इस काव्य के सार्वभौमिक होने का संकेत है। यह काव्य वाल्मीकि द्वारा रचा गया – इस प्रकार रामायण के रचयिता के रूप में वाल्मीकि की स्थापना हुई।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग २ – श्लोक ३५ ॥

रामस्य चरितं सर्वं कृतवान् भुवि विश्रुतम् ।
लोके रामायणं चैतत्काव्यं वाल्मीकिना कृतम् ॥
rāmasya caritaṃ sarvaṃ kṛtavān bhuvi viśrutam |
loke rāmāyaṇaṃ caitatkāvyaṃ vālmīkinā kṛtam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उन्होंने राम के सम्पूर्ण, पृथ्वी पर प्रसिद्ध चरित्र का वर्णन किया और इस प्रकार यह रामायण काव्य वाल्मीकि द्वारा रचा गया।

🔹 English Translation : He composed the entire character of Rama, famous on earth. And thus this Ramayana poetry was composed by Valmiki in the world.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
रामस्यसंज्ञा, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनराम के
चरितम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनचरित्र को
सर्वम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनसम्पूर्ण
कृतवान्क्रिया, परोक्षभूत, प्रथमपुरुष एकवचनकिया, रचा
भुविसंज्ञा, स्त्रीलिंग, सप्तमी एकवचनपृथ्वी पर
विश्रुतम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनप्रसिद्ध
लोकेसंज्ञा, पुल्लिंग, सप्तमी एकवचनलोक में, संसार में
रामायणम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनरामायण
अव्ययऔर
एतत्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनयह
काव्यम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनकाव्य
वाल्मीकिनासंज्ञा, पुल्लिंग, तृतीया एकवचनवाल्मीकि द्वारा
कृतम्भूतकालिक कृदंत, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनकिया गया, रचा गया

📖 विशेष अर्थ एवं टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के रचनाकार और उसके महत्त्व को स्पष्ट करता है। "भुवि विश्रुतम्" से यह सिद्ध होता है कि राम का चरित्र पहले से ही लोक में प्रसिद्ध था, और वाल्मीकि ने उसे काव्यबद्ध किया। "वाल्मीकिना कृतम्" – इससे रामायण के रचयिता के रूप में वाल्मीकि की अमर कीर्ति स्थापित हुई। आज भी रामायण का नाम आते ही वाल्मीकि का स्मरण हो जाता है। यह श्लोक रामायण के समापन की सूचना देता है और आगे के श्लोक इसके पाठ के फल का वर्णन करेंगे।