संस्कृत श्लोक

सप्त काण्डांस्ततः कृत्वा सोपानानिव मानवः । तत्र तत्र च रामस्य चकार चरितं शुभम् ॥

हिंदी अनुवाद

फिर सात काण्डों की रचना करके, जैसे मनुष्य सीढ़ियाँ बनाते हैं, वैसे ही उन्होंने स्थान-स्थान पर राम के शुभ चरित्र का वर्णन किया।

अर्थ / व्याख्या

वाल्मीकि ने सात काण्डों की रचना की, जैसे सीढ़ियाँ बनाकर कोई ऊपर चढ़ता है, और प्रत्येक स्थान पर राम के शुभ चरित्र का वर्णन किया।

टिप्पणी

इस श्लोक में रामायण के सात काण्डों की रचना को सीढ़ियों से उपमित किया गया है। जिस प्रकार मनुष्य सीढ़ियाँ बनाकर ऊपर चढ़ता है, उसी प्रकार वाल्मीकि ने सात काण्डों के माध्यम से पाठक को रामचरित के उच्चतम बिन्दु तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त किया। "तत्र तत्र" का अर्थ है प्रत्येक काण्ड में, प्रत्येक प्रसंग में उन्होंने राम के शुभ चरित्र का सुन्दर वर्णन किया।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग २ – श्लोक ३४ ॥

सप्त काण्डांस्ततः कृत्वा सोपानानिव मानवः ।
तत्र तत्र च रामस्य चकार चरितं शुभम् ॥
sapta kāṇḍāṃstataḥ kṛtvā sopānāniva mānavaḥ |
tatra tatra ca rāmasya cakāra caritaṃ śubham ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : फिर सात काण्डों की रचना करके, जैसे मनुष्य सीढ़ियाँ बनाते हैं, वैसे ही उन्होंने स्थान-स्थान पर राम के शुभ चरित्र का वर्णन किया।

🔹 English Translation : Then, having made seven Kandas, like a man (makes) steps, he composed the auspicious character of Rama here and there (in each section).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सप्तसंख्या, अव्ययसात
काण्डान्संज्ञा, पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचनकाण्डों को
ततःअव्ययफिर
कृत्वाल्यबन्त अव्यय (कृ धातु)बनाकर
सोपानानिसंज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया बहुवचनसीढ़ियों को
इवअव्ययजैसे
मानवःसंज्ञा, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमनुष्य
तत्र तत्रअव्ययवहाँ-वहाँ, प्रत्येक स्थान पर
अव्ययऔर
रामस्यसंज्ञा, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनराम के
चकारक्रिया, लिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचनकिया, वर्णन किया
चरितम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनचरित्र का
शुभम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनशुभ, कल्याणकारी

📖 विशेष अर्थ एवं टिप्पणी

इस श्लोक में एक सुन्दर उपमा है – सप्त काण्ड सीढ़ियों के समान हैं। जैसे सीढ़ियाँ धीरे-धीरे ऊपर ले जाती हैं, वैसे ही प्रत्येक काण्ड पाठक को रामचरित के गहरे अर्थ और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है। "तत्र तत्र" का अर्थ है कि हर काण्ड में, हर प्रसंग में राम का शुभ चरित्र उजागर हुआ है। "शुभम्" विशेषण यह बताता है कि राम का चरित्र मात्र ऐतिहासिक नहीं, बल्कि कल्याणकारी और आदर्श है।

इस प्रकार वाल्मीकि ने रामकथा को सोपानबद्ध करके उसे सहज ग्राह्य बना दिया।