संस्कृत श्लोक

बालकाण्डमथो अयोध्याकाण्डमारण्यकं तथा । किष्किन्धाकाण्डसुन्दरौ युद्धकाण्डमुत्तरम् ॥

हिंदी अनुवाद

बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, युद्धकाण्ड और उत्तरकाण्ड – ऐसे सात काण्डों में विभाजित किया।

अर्थ / व्याख्या

रामायण को सात काण्डों (खण्डों) में विभाजित किया गया।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के सात काण्डों के नाम बताता है। यह विभाजन अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि रामकथा को सुव्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने के लिए वाल्मीकि ने इन सात खण्डों में बाँटा। क्रमशः बालकाण्ड (बाल्यकाल), अयोध्याकाण्ड (अयोध्या प्रसंग), अरण्यकाण्ड (वनवास), किष्किन्धाकाण्ड (किष्किन्धा निवास एवं सुग्रीव मित्रता), सुन्दरकाण्ड (हनुमान का सुन्दर कार्य), युद्धकाण्ड (रण), उत्तरकाण्ड (उत्तर जीवन)।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग २ – श्लोक ३३ ॥

बालकाण्डमथो अयोध्याकाण्डमारण्यकं तथा ।
किष्किन्धाकाण्डसुन्दरौ युद्धकाण्डमुत्तरम् ॥
bālakāṇḍamatho ayodhyākāṇḍamāraṇyakaṃ tathā |
kiṣkindhākāṇḍasundarau yuddhakāṇḍamuttaram ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, युद्धकाण्ड और उत्तरकाण्ड – ऐसे सात काण्डों में विभाजित किया।

🔹 English Translation : Balakanda, Ayodhyakanda, Aranyakanda, Kishkindhakanda, Sundarakanda, Yuddhakanda and Uttarakanda – (thus divided into seven Kandas).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
बालकाण्डम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनबालकाण्ड
अथोअव्ययतथा, इसके बाद
अयोध्याकाण्डम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनअयोध्याकाण्ड
आरण्यकम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनआरण्यकाण्ड (अरण्यकाण्ड)
तथाअव्ययइस प्रकार, और
किष्किन्धाकाण्डसंज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनकिष्किन्धाकाण्ड
सुन्दरौसंज्ञा, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन (सुन्दर + काण्ड) – यहाँ सुन्दरकाण्ड के लिए प्रयुक्तसुन्दरकाण्ड
युद्धकाण्डम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनयुद्धकाण्ड
उत्तरम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन (उत्तरकाण्ड)उत्तरकाण्ड

📖 विशेष अर्थ एवं टिप्पणी

इस श्लोक में रामायण के सात काण्डों की सूची दी गई है। यह विभाजन वाल्मीकि की व्यवस्थित दृष्टि का परिचायक है। प्रत्येक काण्ड रामकथा के एक विशिष्ट चरण का वर्णन करता है। "बालकाण्ड" में राम के जन्म से लेकर विवाह तक की कथा है। "अयोध्याकाण्ड" में राज्याभिषेक की तैयारी और वनवास का प्रसंग। "अरण्यकाण्ड" में वन में राम के जीवन और सीता हरण की घटना। "किष्किन्धाकाण्ड" में सुग्रीव से मित्रता और वाली-वध। "सुन्दरकाण्ड" में हनुमान की लंका यात्रा और सीता से भेंट। "युद्धकाण्ड" में राम-रावण युद्ध और रावण-वध। "उत्तरकाण्ड" में राम के राज्याभिषेक के बाद की घटनाएँ और सीता का वनगमन।

यह श्लोक रामायण के अध्ययन के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।