संस्कृत श्लोक

तावद्रमकथां लोके कीर्तियास्यति शाश्वतीम् । यावत्स्थास्यन्ति गिरयः सरितश्च महीतले ॥

हिंदी अनुवाद

जब तक इस पृथ्वी पर पर्वत और नदियाँ स्थित रहेंगे, तब तक यह रामकथा संसार में शाश्वत कीर्ति को प्राप्त होगी।

अर्थ / व्याख्या

ब्रह्मा वाल्मीकि को रामकथा की अमरता का आश्वासन देते हैं – यह कथा तब तक अमर रहेगी जब तक पृथ्वी पर पर्वत और नदियाँ हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक अत्यन्त प्रसिद्ध है और रामायण की अमरता का प्रतीक बन गया है। ब्रह्मा जी वाल्मीकि को आश्वासन देते हैं कि उनके द्वारा रचित रामकथा संसार में सदा प्रतिष्ठित रहेगी, जब तक यह पृथ्वी पर पर्वत और नदियाँ विद्यमान हैं। "गिरयः सरितः" – प्राकृतिक स्थलचिह्न, जो मानव सभ्यता के अत्यन्त प्राचीन और स्थायी प्रतीक हैं, उनके रहने तक रामकथा भी रहेगी – यह कथन अक्षरशः सत्य हुआ। आज हजारों वर्ष बाद भी रामकथा जन-जन में जीवित है।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग २ – श्लोक २६ ॥

तावद्रमकथां लोके कीर्तियास्यति शाश्वतीम् ।
यावत्स्थास्यन्ति गिरयः सरितश्च महीतले ॥
tāvadramakathāṃ loke kīrtiyāsyati śāśvatīm |
yāvatsthāsyanti girayaḥ saritaśca mahītale ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : जब तक इस पृथ्वी पर पर्वत और नदियाँ स्थित रहेंगे, तब तक यह रामकथा संसार में शाश्वत कीर्ति को प्राप्त होगी।

🔹 English Translation : As long as the mountains and rivers remain on the earth, so long will this story of Rama attain eternal fame in the world.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तावत्अव्ययतब तक, उतने काल तक
रामकथाम्संज्ञा, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनराम की कथा को
लोकेसंज्ञा, पुल्लिंग, सप्तमी एकवचनलोक में, संसार में
कीर्तिम्संज्ञा, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनकीर्ति, यश को
आस्यतिक्रिया, लृट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (अस् धातु – प्राप्त होना)प्राप्त होगी
शाश्वतीम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनशाश्वत, सनातन
यावत्अव्ययजब तक
स्थास्यन्तिक्रिया, लृट्लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन (स्था धातु)स्थित रहेंगे
गिरयःसंज्ञा, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनपर्वत
सरितःसंज्ञा, स्त्रीलिंग, प्रथमा बहुवचननदियाँ
अव्ययऔर
महीतलेसंज्ञा (मही + तल), नपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनपृथ्वी के तल पर, धरती पर

📖 विशेष अर्थ एवं टिप्पणी

यह श्लोक रामायण की चिरंजीविता का वरदान है। ब्रह्मा जी कहते हैं कि जब तक यह सृष्टि (पर्वत, नदियाँ) रहेगी, तब तक रामकथा भी रहेगी। यह वरदान सत्य सिद्ध हुआ – आज भी भारत की हर गली, हर मंदिर, हर घर में रामकथा गाई-सुनी जाती है। यह श्लोक रामायण के कालजयी होने का प्रमाण है। "कीर्तियास्यति शाश्वतीम्" – यह कीर्ति शाश्वत है, अर्थात इसका कभी नाश नहीं होगा। पर्वत और नदियाँ भले ही कालान्तर में बदलें, पर रामकथा की अमरता अटल है।

यह श्लोक अक्सर रामायण के पाठ के आरम्भ में या समापन पर बोला जाता है, और यह रामकथा के प्रति आस्था को दृढ़ करता है।