संस्कृत श्लोक

तन्मद्वचन्महाबाहो रामचरितमुत्तमम् । कुरु त्वं काव्यमाख्यानं सीतायाश्चरितैर्युतम् ॥

हिंदी अनुवाद

इसलिए हे महाबाहो! मेरे वचन से तुम सीता के चरित्रों से युक्त, राम के उत्तम चरित्र वाले आख्यान काव्य की रचना करो।

अर्थ / व्याख्या

ब्रह्मा वाल्मीकि को सीता के चरित्र सहित राम की गाथा को महाकाव्य के रूप में रचने का आदेश देते हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के रचना-बीज का स्पष्ट निर्देश है। "महाबाहो" संबोधन वाल्मीकि की शक्ति और सामर्थ्य को रेखांकित करता है। "रामचरितमुत्तमम्" कहकर राम के चरित्र की उत्कृष्टता बताई गई है। "सीतायाश्चरितैर्युतम्" – रामायण केवल राम की कथा नहीं, सीता के चरित्र से युक्त है – यह सीता के महत्त्व को प्रतिष्ठित करता है। "काव्यमाख्यानम्" – यह एक आख्यान काव्य (महाकाव्य) होगा, जो इतिहास और काव्य का सम्मिश्रण है।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग २ – श्लोक २५ ॥

तन्मद्वचन्महाबाहो रामचरितमुत्तमम् ।
कुरु त्वं काव्यमाख्यानं सीतायाश्चरितैर्युतम् ॥
tanmadvacanmahābāho rāmacaritamuttamam |
kuru tvaṃ kāvyamākhyānaṃ sītāyāścaritairyutam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : इसलिए हे महाबाहो! मेरे वचन से तुम सीता के चरित्रों से युक्त, राम के उत्तम चरित्र वाले आख्यान काव्य की रचना करो।

🔹 English Translation : Therefore, O mighty-armed one, by my word, you compose the excellent narrative poetry of Rama's deeds, accompanied by the character (deeds) of Sita.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तत्अव्ययइसलिए
मद्वचनात्संज्ञा (मद् + वचन), नपुंसकलिंग, पञ्चमी एकवचनमेरे वचन से, मेरे कहने से
महाबाहोविशेषण, पुल्लिंग, सम्बोधन एकवचनहे महाबाहो, हे बलशाली
रामचरितम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनराम के चरित्र को
उत्तमम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनउत्तम
कुरुक्रिया, लोट्लकार, मध्यमपुरुष एकवचन (कृ धातु)करो, रचना करो
त्वम्सर्वनाम, मध्यमपुरुष, प्रथमा एकवचनतुम
काव्यम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनकाव्य
आख्यानम्संज्ञा, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनआख्यान, कथा
सीतायाःसंज्ञा, स्त्रीलिंग, षष्ठी एकवचनसीता के
चरितैःसंज्ञा, नपुंसकलिंग, तृतीया बहुवचनचरित्रों से, चरितों द्वारा
युतम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनयुक्त, सहित

📖 विशेष अर्थ एवं टिप्पणी

ब्रह्मा का यह आदेश रामायण के जन्म का क्षण है। "मद्वचनात्" कहकर ब्रह्मा दैवी संकेत देते हैं कि यह काव्य केवल मानवीय प्रयास नहीं, बल्कि दिव्य प्रेरणा से रचा जाएगा। "महाबाहो" संबोधन वाल्मीकि को शारीरिक और आध्यात्मिक बल का स्मरण कराता है। रामचरित को "उत्तमम्" कहना राम के चरित्र की सर्वोच्चता स्थापित करता है। सीता के चरित्रों से युक्त रामायण का वर्णन यह सिद्ध करता है कि सीता इस काव्य की केन्द्रीय नारी-चरित्र हैं, और उनके बिना रामकथा अधूरी है।

आगे चलकर वाल्मीकि ने ठीक इसी प्रकार रामायण की रचना की, जिसमें सीता के चरित्र को बराबर का महत्त्व मिला। इस श्लोक में "काव्य" और "आख्यान" दोनों शब्द आए हैं – यह बताता है कि रामायण केवल सूखा इतिहास नहीं, बल्कि काव्य-गुणों से युक्त महाकाव्य है।