संस्कृत श्लोक

ब्रह्मोवाच श्लोक एव त्वया बद्धो नात्र कार्या विचारणा । वचोभिः शोकजैरेषां पक्षिणां दुःखितेन च ॥

हिंदी अनुवाद

ब्रह्मा ने कहा- यह श्लोक तुमने बाँध लिया, इसमें विचार करने की आवश्यकता नहीं है। यह इन दुःखी पक्षियों के विषय में शोक से उत्पन्न वचनों से तुम्हारे मुख से निकला है।

अर्थ / व्याख्या

ब्रह्मा वाल्मीकि के मुख से निकले करुण श्लोक को दिव्य स्वीकृति प्रदान करते हैं और उसे अपरिवर्तनीय घोषित करते हैं।

टिप्पणी

यह अत्यन्त महत्वपूर्ण श्लोक है। ब्रह्मा जी पुष्टि करते हैं कि वाल्मीकि द्वारा रचित (बद्धः) श्लोक पूर्णतः उपयुक्त है, उस पर किसी संशय या विचार की आवश्यकता नहीं। यह श्लोक करुणा (शोक) से उत्पन्न हुआ है, और वही करुणा सम्पूर्ण रामायण का मूल रस होगा। "शोकजैः वचोभिः" यह बताता है कि सच्चा काव्य हृदय के गहरे भावों से जन्मता है।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग २ – श्लोक २४ ॥

ब्रह्मोवाच श्लोक एव त्वया बद्धो नात्र कार्या विचारणा ।
वचोभिः शोकजैरेषां पक्षिणां दुःखितेन च ॥
brahmovāca śloka eva tvayā baddho nātra kāryā vicāraṇā |
vacobhiḥ śokajaireṣāṃ pakṣiṇāṃ duḥkhitena ca ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : ब्रह्मा ने कहा- यह श्लोक तुमने बाँध लिया, इसमें विचार करने की आवश्यकता नहीं है। यह इन दुःखी पक्षियों के विषय में शोक से उत्पन्न वचनों से तुम्हारे मुख से निकला है।

🔹 English Translation : Brahma said: "You have composed this verse indeed; there is no need to deliberate about it. It has emerged from your mouth through the sorrow-born words concerning these grief-stricken birds."

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ब्रह्मासंज्ञा, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनब्रह्मा
उवाचक्रिया, लिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (वच् धातु)बोले, कहा
श्लोकःसंज्ञा, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनश्लोक
एवअव्ययही
त्वयासर्वनाम, मध्यमपुरुष, तृतीया एकवचनतुम्हारे द्वारा
बद्धःभूतकालिक कृदंत (बन्ध् धातु), पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनरचा गया, बाँधा गया
अव्ययनहीं
अत्रअव्ययइस (श्लोक) में
कार्याविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन (कृदंत)करने योग्य, करनी चाहिए
विचारणासंज्ञा, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनविचार, चिन्तन
वचोभिःसंज्ञा, नपुंसकलिंग, तृतीया बहुवचनवचनों से
शोकजैःविशेषण, नपुंसकलिंग, तृतीया बहुवचनशोक से उत्पन्न
एषाम्सर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनइनका
पक्षिणाम्संज्ञा, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनपक्षियों के
दुःखितेनविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचनदुःखी हुए (मन से)
अव्ययऔर

📖 विशेष अर्थ एवं टिप्पणी

ब्रह्मा के इस कथन में "श्लोक एव त्वया बद्धः" कहकर वे उस श्लोक की दिव्यता को स्वीकार करते हैं जो वाल्मीकि के मुख से करुणावश निकला था। "नात्र कार्या विचारणा" यह घोषणा करता है कि यह श्लोक अपौरुषेय एवं सहज-स्फूर्त है, उसमें किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं। यही श्लोक आगे चलकर रामायण के २४,००० श्लोकों का बीज बनता है। "शोकजैः वचोभिः" कहकर ब्रह्मा करुण रस को काव्य का मूल स्रोत बताते हैं – जो बाद में "शोकः श्लोकत्वमागतः" कहलाया।

यह श्लोक साहित्य-दर्शन की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसमें काव्य की उत्पत्ति का रहस्य छिपा है – हृदय का आवेग ही सच्चा काव्य बनता है। ब्रह्मा का यह वाक्य वाल्मीकि को रामायण रचने की प्रेरणा देने का पूर्वाभ्यास है।