राम की कहानी – श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

वालिप्रमथनं चैव सुग्रीवप्रतिपादनम् । ताराविलापं समयं वर्षरात्रनिवासनम् ॥

हिंदी अनुवाद

वालि का वध, सुग्रीव को राज्य सौंपना, तारा का विलाप, ऋतु (वर्षा) की रातों में निवास करना।

अर्थ / व्याख्या

राम द्वारा वालि का वध किए जाने के बाद, सुग्रीव को किष्किन्धा का राजा बनाया जाता है। वालि की पत्नी तारा विलाप करती है। राम और लक्ष्मण वर्षा ऋतु की रातें उसी क्षेत्र में बिताते हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक राम के वचनबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने सुग्रीव को वालि से मुक्ति दिलाई और उसे राजा बनाया। तारा का विलाप करुणा का अद्भुत उदाहरण है, जो युद्ध की विभीषिका को दर्शाता है। वर्षा ऋतु का वर्णन राम के धैर्य और प्रतीक्षा को दर्शाता है, क्योंकि वर्षा समाप्त होने पर ही सीता की खोज का अभियान शुरू हो सकता था।

॥ श्री रामायण – बाल काण्ड – अध्याय ३ – श्लोक २४ ॥

वालिप्रमथनं चैव सुग्रीवप्रतिपादनम् । ताराविलापं समयं वर्षरात्रनिवासनम् ॥
vālipramathanaṃ caiva sugrīvapratipādanam | tārāvilāpaṃ samayaṃ varṣarātranivāsanam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : वालि का वध, सुग्रीव को राज्य सौंपना, तारा का विलाप, ऋतु (वर्षा) की रातों में निवास करना।

🔹 English Translation : The killing of Vali, establishing Sugriva (as king), the lamentation of Tara, and spending the nights of the rainy season (there).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
वालिप्रमथनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनवालि का वध (प्रमथन = हनन)
चैवअव्ययऔर भी
सुग्रीवप्रतिपादनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनसुग्रीव को राज्य सौंपना/स्थापित करना
ताराविलापम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनतारा (वालि की पत्नी) का विलाप
समयम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनऋतु, समय, वादा
वर्षरात्रनिवासनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनवर्षा की रातों में निवास करना

📖 व्याख्या एवं महत्व

यह श्लोक राम के न्याय और प्रतिज्ञा पालन का प्रतीक है। राम ने सुग्रीव को दिए वचन के अनुसार, वालि से युद्ध किया और उसका वध किया। वालि के वध के पश्चात, राम ने सुग्रीव को किष्किन्धा के राज्य का स्वामी बनाया। यह घटना धर्म की विजय और अत्याचार के अंत का प्रतीक है। लेकिन इस युद्ध का एक दुखद पहलू भी था – तारा का विलाप। वालि की पत्नी तारा ने अपने पति की मृत्यु पर जो करुण क्रंदन किया, वह रामायण के सबसे मार्मिक प्रसंगों में से एक है। उसके विलाप से यह पता चलता है कि युद्ध और वध से केवल शोक ही बढ़ता है। इसके बाद, राम ने वर्षा ऋतु के चार महीने प्रतिक्षा में बिताए। यह समय सुग्रीव को अपने राज्य को व्यवस्थित करने और सेना को संगठित करने का था। राम की यह प्रतीक्षा उनके धैर्य और संयम का परिचायक है। वे परिस्थितियों के अनुसार ढलना जानते थे और अवसर आने पर ही कार्यवाही करना उचित समझते थे।

तारा के विलाप ने राम के हृदय को भी द्रवित किया, लेकिन धर्म की रक्षा के लिए यह आवश्यक था। इस घटना से यह सीख मिलती है कि कभी-कभी बड़े हित के लिए कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं। वर्षा-निवास का समय राम के जीवन में एक शांत अंतराल था, जो आगामी महासंग्राम की तैयारी का समय था।