राम की कहानी – श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
ऋष्यमूकस्य गमनं सुग्रीवेण समागमम् । प्रत्ययोत्पादनं सख्यं वालिसुग्रीवविग्रहम् ॥
हिंदी अनुवाद
ऋष्यमूक पर्वत पर जाना, सुग्रीव से मिलना, विश्वास उत्पन्न करना, मित्रता करना और वालि-सुग्रीव के बीच वैर का वर्णन।
अर्थ / व्याख्या
हनुमान के कहने पर राम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत पर जाते हैं और वहाँ सुग्रीव से मिलते हैं। सुग्रीव को राम पर विश्वास दिलाया जाता है, और दोनों में अग्नि को साक्षी मानकर मित्रता होती है। सुग्रीव अपने बड़े भाई वालि से हुए विग्रह (झगड़े) का वर्णन करते हैं।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और भावनात्मक गठजोड़ को दर्शाता है। राम और सुग्रीव की मित्रता धर्म और आपसी लाभ पर आधारित थी। सुग्रीव को वालि के भय से मुक्ति चाहिए थी, और राम को सीता की खोज के लिए एक शक्तिशाली सहयोगी की आवश्यकता थी। हनुमान ने इस मित्रता में सेतु का कार्य किया।
॥ श्री रामायण – बाल काण्ड – अध्याय ३ – श्लोक २३ ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : ऋष्यमूक पर्वत पर जाना, सुग्रीव से मिलना, विश्वास उत्पन्न करना, मित्रता करना और वालि-सुग्रीव के बीच वैर का वर्णन।
🔹 English Translation : Going to Rishyamuka mountain, meeting Sugriva, creating mutual trust, making friendship, and the enmity between Vali and Sugriva.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| ऋष्यमूकस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | ऋष्यमूक (पर्वत) के लिए/पर |
| गमनम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | जाना, गमन करना |
| सुग्रीवेण | पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | सुग्रीव के साथ |
| समागमम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | मिलन, समागम |
| प्रत्ययोत्पादनम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | प्रत्यय (विश्वास) उत्पन्न करना |
| सख्यम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | मित्रता, सख्य भाव |
| वालिसुग्रीवविग्रहम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | वालि और सुग्रीव के बीच विग्रह (झगड़ा) |
📖 व्याख्या एवं महत्व
यह श्लोक राम-सुग्रीव मैत्री की आधारशिला रखता है। हनुमान ने राम और लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत पर पहुँचाया, जहाँ सुग्रीव छिपकर रह रहे थे। पहले सुग्रीव को राम पर संदेह हुआ कि वे वालि द्वारा भेजे गए छलावे हो सकते हैं, लेकिन हनुमान ने राम की सच्चाई को पहचाना और सुग्रीव का विश्वास दिलाया। राम ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए बालि का वध करने का वचन दिया। इस पर अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने मित्रता की। इस मित्रता ने सीता की खोज को एक संगठित रूप दिया। सुग्रीव ने राम को अपने भाई वालि से हुए विग्रह की पूरी कहानी बताई, कि कैसे वालि ने उसकी पत्नी और राज्य छीन लिया। इस प्रकार, यह मिलन धर्म और मैत्री का एक आदर्श उदाहरण बन गया।
यह घटना यह सिखाती है कि सच्ची मित्रता में विश्वास और परस्पर सहायता का भाव होना चाहिए। राम ने मित्र के रूप में सुग्रीव के दुःख को अपना दुःख बनाया और सुग्रीव ने राम की पत्नी की खोज में अपनी पूरी सेना लगा दी।