राम की कहानी – श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

शबरीदर्शनं चैव फलमूलाशनं तथा । प्रलापं चैव पम्पायां हनूमद्दर्शनं तथा ॥

हिंदी अनुवाद

शबरी का दर्शन, फल-मूल का भोजन, पम्पा सरोवर पर विलाप और हनुमान का दर्शन।

अर्थ / व्याख्या

राम और लक्ष्मण की भेंट शबरी से होती है, जो उन्हें भक्तिभाव से फल खिलाती है। तत्पश्चात राम पम्पा सरोवर पर फिर से सीता के वियोग में विलाप करते हैं। वहीं उनकी भेंट हनुमान से होती है, जो सुग्रीव के दूत के रूप में आते हैं।

टिप्पणी

शबरी का प्रसंग भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। उसने राम के आने की प्रतीक्षा में वर्षों बिताए। राम ने उसके द्वारा चखे हुए फल खाकर उसकी भक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया। पम्पा पर विलाप राम के विरह का चरम है। इसी बीच हनुमान का आगमन होता है, जो राम के दुःख को दूर करने वाले मित्र और सेवक के रूप में उभरते हैं।

॥ श्री रामायण – बाल काण्ड – अध्याय ३ – श्लोक २२ ॥

शबरीदर्शनं चैव फलमूलाशनं तथा । प्रलापं चैव पम्पायां हनूमद्दर्शनं तथा ॥
śabarīdarśanaṃ caiva phalamūlāśanaṃ tathā | pralāpaṃ caiva pampāyāṃ hanūmaddarśanaṃ tathā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : शबरी का दर्शन, फल-मूल का भोजन, पम्पा सरोवर पर विलाप और हनुमान का दर्शन।

🔹 English Translation : The meeting with Shabari, eating fruits and roots, lamenting at Lake Pampa, and the meeting with Hanuman.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
शबरीदर्शनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनशबरी (तपस्विनी) का दर्शन
चैवअव्यय (च + एव)और भी
फलमूलाशनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनफल और जड़ों का भोजन करना
तथाअव्ययतथा, वैसे ही
प्रलापम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनप्रलाप, व्याकुलतापूर्ण बातें
चैवअव्ययऔर भी
पम्पायाम्स्त्रीलिंग, सप्तमी एकवचनपम्पा सरोवर में
हनूमद्दर्शनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनहनुमान का दर्शन

📖 व्याख्या एवं महत्व

यह श्लोक राम की आध्यात्मिक यात्रा और मिलन के क्षणों का वर्णन करता है। शबरी, एक आदिवासी महिला, राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति के लिए जानी जाती हैं। उनका राम को फल खिलाना यह दर्शाता है कि भगवान के लिए भावना प्रधान होती है, न कि द्रव्य। राम द्वारा उन फलों को ग्रहण करना यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति और प्रेम ही परमात्मा को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग है। इसके बाद राम पम्पा सरोवर पर पहुँचते हैं और सीता के वियोग में बेहद व्याकुल होते हैं। उनका यह विलाप उनके मानवीय स्वरूप और दाम्पत्य प्रेम की गहराई को दर्शाता है। ठीक इसी समय हनुमान का प्रकट होना एक महत्वपूर्ण मोड़ है। हनुमान, जो स्वयं भगवान शिव के अंश हैं, राम के परम भक्त और सहायक बनने के लिए आते हैं। यह मिलन राम और सुग्रीव के बीच मित्रता की नींव रखता है, जो आगे चलकर सीता की खोज में महत्वपूर्ण सिद्ध होता है।

शबरी का आश्रम राम के लिए विश्राम स्थल था, जहाँ उन्हें सच्चा प्रेम मिला। वहीं पम्पा का विलाप उनके हृदय की पीड़ा को बाहर लाता है, जिसे सुनकर हनुमान उनकी सहायता करने को प्रेरित होते हैं।