राम की कहानी – श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

राघवस्य विलापं च गृध्रराजनिबर्हणम् । कबन्धदर्शनं चैव पम्पायाश्चापि दर्शनम् ॥

हिंदी अनुवाद

राघव (राम) का विलाप, गृध्रराज (जटायु) का वध, कबन्ध का दर्शन तथा पम्पा सरोवर का भी दर्शन।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक राम के वनवास के दुःखद घटनाक्रम को संक्षेप में बताता है - सीता की खोज में व्याकुल राम का विलाप, वीर जटायु का रावण से युद्ध करते हुए वध, तथा आगे की यात्रा में राम का कबन्ध नामक राक्षस से मिलना और पम्पा सरोवर के तट पर पहुँचना। ये घटनाएँ राम के जीवन में संक्रमणकालीन क्षण हैं, जो उन्हें हनुमान और सुग्रीव से मिलाने का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के उस महत्वपूर्ण चरण को चिन्हित करता है जहाँ करुणा और दुःख चरम पर है। जटायु का बलिदान अद्वितीय है, जिसने रावण को रोकने का प्रयास किया। कबन्ध की कथा राम और लक्ष्मण को सुग्रीव से मिलने की प्रेरणा देती है। पम्पा सरोवर का वर्णन प्राकृतिक सौंदर्य और राम के मानसिक दुःख के विरोधाभास को दर्शाता है।

॥ श्री रामायण – बाल काण्ड – अध्याय ३ – श्लोक २१ ॥

राघवस्य विलापं च गृध्रराजनिबर्हणम् । कबन्धदर्शनं चैव पम्पायाश्चापि दर्शनम् ॥
rāghavasya vilāpaṃ ca gṛdhrarājanibarhaṇam | kabandhadarśanaṃ caiva pampāyāścāpi darśanam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : राघव (राम) का विलाप, गृध्रराज (जटायु) का वध, कबन्ध का दर्शन तथा पम्पा सरोवर का भी दर्शन।

🔹 English Translation : The lamentation of Raghava (Rama), the killing of the king of vultures (Jatayu), the sight of Kabandha, and also the sight of Lake Pampa.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
राघवस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनराम का (रघुकुल में उत्पन्न होने के कारण)
विलापम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनविलाप, दुःखपूर्ण चीत्कार
अव्ययऔर
गृध्रराजनिबर्हणम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनगृध्रराज (जटायु) का वध (निबर्हण = वध)
कबन्धदर्शनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनकबन्ध (नामक राक्षस) का दर्शन
चैवअव्ययऔर भी
पम्पायाःस्त्रीलिंग, षष्ठी एकवचनपम्पा (सरोवर) का
चापिअव्यय (च + अपि)और भी
दर्शनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनदर्शन, देखना

📖 व्याख्या एवं महत्व

इस श्लोक में महर्षि वाल्मीकि राम की दुःख भरी यात्रा का सार प्रस्तुत करते हैं। सीता की खोज में व्याकुल राम विलाप करते हैं, जो उनके वैवाहिक प्रेम और करुणा का परिचायक है। इसी दौरान उनकी भेंट मृत जटायु से होती है, जो रावण से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। जटायु की मृत्यु राम के लिए एक और आघात है, लेकिन यह उन्हें दक्षिण दिशा का संकेत भी देती है। आगे चलकर राम का सामना विचित्र राक्षस कबन्ध से होता है, जिसका वध करने पर वह शापमुक्त होकर उन्हें ऋष्यमूक पर्वत पर सुग्रीव से मिलने की सलाह देता है। इसके बाद राम पम्पा सरोवर पहुँचते हैं, जिसका नैसर्गिक सौंदर्य राम के आंतरिक द्वंद्व को और उजागर करता है। यह श्लोक राम की करुण गाथा को एक नई दिशा प्रदान करता है, उन्हें वानरराज से मिलने का मार्ग दिखाता है।

जटायु का बलिदान मित्रता और कर्तव्य का सर्वोच्च उदाहरण है। कबन्ध की कथा हमें सिखाती है कि दुष्ट प्रवृत्तियों से भी सही मार्गदर्शन मिल सकता है यदि उनका नाश कर दिया जाए। पम्पा सरोवर का वर्णन रामायण के प्रकृति-प्रेम को भी दर्शाता है।