राम की कहानी – श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

वधं खरत्रिशिरसोरुत्थानं रावणस्य च । मारीचस्य वधं चैव वैदेह्या हरणं तथा ॥

हिंदी अनुवाद

खर और त्रिशिरा का वध, रावण का उद्योग (प्रतिशोध के लिए उठना), मारीच का वध, और वैदेही (सीता) का हरण।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक शूर्पणखा के प्रतिशोध में खर-दूषण आदि राक्षसों के वध, रावण का क्रोधित होना, फिर मारीच की सहायता से सीता-हरण की घटना का संकेत करता है।

टिप्पणी

शूर्पणखा के विरूपण के बाद उसने अपने भाइयों खर, दूषण, त्रिशिरा आदि से शिकायत की। उन्होंने राम पर आक्रमण किया और राम ने चौदह हजार राक्षसों सहित उन सबका वध कर दिया। इससे रावण क्रोधित हुआ और उसने मारीच की सहायता से सीता का हरण करने की योजना बनाई। मारीच ने स्वर्णमृग का रूप धारण किया और राम के भेजे जाने पर लक्ष्मण द्वारा मारा गया। रावण ने उस अवसर पर सीता का हरण किया।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक २० ॥

वधं खरत्रिशिरसोरुत्थानं रावणस्य च ।
मारीचस्य वधं चैव वैदेह्या हरणं तथा ॥
vadhaṃ kharatriśirasorutthānaṃ rāvaṇasya ca |
mārīcasya vadhaṃ caiva vaidehyā haraṇaṃ tathā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : खर और त्रिशिरा का वध, रावण का उद्योग (प्रतिशोध के लिए उठना), मारीच का वध, और वैदेही (सीता) का हरण।

🔹 English Translation : The killing of Khara and Trishiras, the rising (for revenge) of Ravana, the killing of Maricha, and the abduction of Vaidehi (Sita).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृत पदव्याकरणहिन्दी अर्थEnglish Meaning
वधम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनवधkilling, slaying
खरत्रिशिरसोःद्विवचन, षष्ठीखर और त्रिशिरा काof Khara and Trishiras
उत्थानम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनउद्योग, प्रयत्नrising, exertion (for revenge)
रावणस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनरावण काof Ravana
अव्ययऔरand
मारीचस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनमारीच काof Maricha
वधम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनवधkilling
अव्ययऔरand
एवअव्ययहीindeed, certainly
वैदेह्याःस्त्रीलिंग, षष्ठी एकवचनवैदेही (सीता) काof Vaidehi (Sita)
हरणम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनहरण, अपहरणabduction
तथाअव्ययइसी प्रकारalso, similarly

📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व

शूर्पणखा के विरूपण के बाद उसने अपने भाइयों खर और त्रिशिरा से प्रतिशोध की याचना की। उन्होंने चौदह हजार राक्षसों के साथ राम पर आक्रमण किया। राम ने अकेले ही सभी राक्षसों का संहार कर दिया, जिसमें खर और त्रिशिरा भी मारे गए। यह समाचार सुनकर रावण अत्यंत क्रोधित हुआ (उत्थानम्) और उसने मारीच की सहायता से सीता-हरण की योजना बनाई। मारीच ने स्वर्णमृग का रूप धारण किया, राम उसे पकड़ने गए और लक्ष्मण को सीता की रक्षा का आदेश दे गए। मारीच ने राम की आवाज की नकल करके लक्ष्मण को भी भगा दिया। तब रावण ने सीता का हरण कर लिया। यह श्लोक रामायण के सर्वाधिक नाटकीय मोड़ का संकेत देता है।

📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष

"खरत्रिशिरसोः" यह द्वंद्व समास है, जिसमें दो राक्षसों के नाम हैं। "उत्थानम्" का अर्थ है उठ खड़ा होना, अर्थात् प्रतिकार के लिए तैयार होना। "मारीचस्य वधम्" – मारीच का वध लक्ष्मण ने किया था। "वैदेह्याः हरणम्" सीता-हरण, जो राम-रावण युद्ध का मूल कारण बना।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक अधर्म के प्रतिकार और उसके परिणामों को दर्शाता है। खर-त्रिशिरा का वध राम की शक्ति का प्रदर्शन है, वहीं रावण का उत्थान उसके अहंकार को दर्शाता है। मारीच का वध और सीता-हरण अधर्म की चरम सीमा है, जो अंततः रावण के विनाश का कारण बनता है।

॥ रामो दाशरथिः शूरः – राम दशरथ-पुत्र वीर हैं ॥