राम की कहानी – श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
दर्शनं चाप्यगस्त्यस्य धनुषो ग्रहणं तथा । शूर्पणख्याश्च संवादं विरूपकरणं तथा ॥
हिंदी अनुवाद
अगस्त्य ऋषि का दर्शन, धनुष (दिव्य धनुष) का ग्रहण, शूर्पणखा से संवाद और उसका विरूपण (नाक-कान काटना)।
अर्थ / व्याख्या
इस श्लोक में अगस्त्य ऋषि से भेंट, उनसे दिव्य धनुष प्राप्त करना, फिर पंचवटी में शूर्पणखा का आगमन, उससे संवाद, और लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक-कान काटने की घटना का संकेत है।
टिप्पणी
राम ने अगस्त्य ऋषि से भेंट की और उनसे दिव्य धनुष-बाण प्राप्त किए। ऋषि के कहने पर उन्होंने पंचवटी में निवास किया। वहाँ शूर्पणखा नामक राक्षसी ने राम पर काममोहित होकर आक्रमण किया। लक्ष्मण ने उसकी नाक और कान काट दिए।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक १९ ॥
शूर्पणख्याश्च संवादं विरूपकरणं तथा ॥
śūrpaṇakhyāśca saṃvādaṃ virūpakaraṇaṃ tathā ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : अगस्त्य ऋषि का दर्शन, धनुष (दिव्य धनुष) का ग्रहण, शूर्पणखा से संवाद और उसका विरूपण (नाक-कान काटना)।
🔹 English Translation : Meeting sage Agastya, receiving the bow, conversation with Shurpanakha, and her disfigurement.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत पद | व्याकरण | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
|---|---|---|---|
| दर्शनम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | दर्शन | meeting |
| च | अव्यय | और | and |
| अपि | अव्यय | भी | also |
| अगस्त्यस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | अगस्त्य ऋषि का | of sage Agastya |
| धनुषः | नपुंसकलिंग, षष्ठी एकवचन | धनुष का | of the bow |
| ग्रहणम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | ग्रहण करना | receiving, taking |
| तथा | अव्यय | इसी प्रकार | also, similarly |
| शूर्पणख्याः | स्त्रीलिंग, षष्ठी एकवचन | शूर्पणखा का | of Shurpanakha |
| च | अव्यय | और | and |
| संवादम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | संवाद, बातचीत | conversation |
| विरूपकरणम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | विरूप करना, नाक-कान काटना | disfigurement |
| तथा | अव्यय | इसी प्रकार | also |
📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व
अगस्त्य ऋषि के दर्शन और उनसे दिव्य धनुष प्राप्त करना राम के लिए वरदान सिद्ध हुआ। इसके बाद राम ने पंचवटी में निवास किया। वहाँ रावण की बहन शूर्पणखा आई और राम पर मोहित हो गई। राम ने उसे सीता की ओर संकेत कर दिया, जिससे वह क्रोधित होकर सीता पर आक्रमण करने लगी। तब लक्ष्मण ने उसकी नाक और कान काट दिए (विरूपकरण)। इस घटना ने रावण को उकसाया और आगे के संघर्ष का मार्ग प्रशस्त किया।
📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष
"धनुषो ग्रहणम्" – यहाँ धनुष का अर्थ वह दिव्य धनुष है जो अगस्त्य ने राम को प्रदान किया। "विरूपकरणम्" का अर्थ है विकृत रूप बना देना, जो शूर्पणखा के साथ हुआ।
🕉️ आध्यात्मिक संदेश
राम ने अगस्त्य ऋषि की आज्ञा का पालन किया और पंचवटी में निवास किया। शूर्पणखा की घटना दर्शाती है कि दुराचार का प्रतिकार करना आवश्यक है। यहाँ राम ने स्वयं नहीं, बल्कि लक्ष्मण ने उसे दंड दिया, जो मर्यादा का पालन है।
॥ रामो विग्रहवान् धर्मः – राम धर्म के मूर्तिमान स्वरूप हैं ॥