राम की कहानी – श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
दर्शनं शरभङ्गस्य सुतीक्ष्णेन समागमम् । अनसूयासमाख्यां च अङ्गरागस्य चार्पणम् ॥
हिंदी अनुवाद
शरभंग ऋषि का दर्शन, सुतीक्ष्ण ऋषि से समागम, अनसूया की कथा और अंगराग (काजल) का दान।
अर्थ / व्याख्या
इस श्लोक में दण्डकारण्य में राम के विभिन्न ऋषियों से मिलने का उल्लेख है: शरभंग का दर्शन, सुतीक्ष्ण से भेंट, अनसूया (अत्रि की पत्नी) की कथा और उनके द्वारा सीता को अंगराग (प्रसाधन सामग्री) प्रदान करना।
टिप्पणी
राम ने दण्डकारण्य में कई ऋषियों के आश्रमों का भ्रमण किया। शरभंग ऋषि ने राम को देखकर स्वर्गारोहण किया। सुतीक्ष्ण ऋषि ने उनका सत्कार किया। अत्रि ऋषि के आश्रम में अनसूया ने सीता को सुहाग की वस्तुएँ (अंगराग) दीं और उन्हें पतिव्रता धर्म की शिक्षा दी।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक १८ ॥
अनसूयासमाख्यां च अङ्गरागस्य चार्पणम् ॥
anasūyāsamākhyāṃ ca aṅgarāgasya cārpaṇam ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : शरभंग ऋषि का दर्शन, सुतीक्ष्ण ऋषि से समागम, अनसूया की कथा और अंगराग (काजल) का दान।
🔹 English Translation : Meeting sage Sharabhanga, association with sage Sutikshna, the narration about Anasuya, and the gift of cosmetic ointment.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत पद | व्याकरण | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
|---|---|---|---|
| दर्शनम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | दर्शन | meeting, sight |
| शरभङ्गस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | शरभंग ऋषि का | of sage Sharabhanga |
| सुतीक्ष्णेन | पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | सुतीक्ष्ण ऋषि के साथ | with sage Sutikshna |
| समागमम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | समागम, मिलन | meeting, association |
| अनसूयासमाख्याम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | अनसूया की कथा | narration about Anasuya |
| च | अव्यय | और | and |
| अङ्गरागस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | अंगराग (काजल) का | of cosmetic ointment (kajal) |
| च | अव्यय | और | and |
| अर्पणम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | अर्पण, देना | gift, offering |
📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व
दण्डकारण्य में राम ने अनेक ऋषियों के दर्शन किए। सबसे पहले शरभंग ऋषि, जो राम की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने राम को देखकर अग्नि में प्रवेश कर स्वर्ग प्राप्त किया। फिर राम सुतीक्ष्ण ऋषि से मिले, जिन्होंने उनका आतिथ्य किया। तत्पश्चात् अत्रि ऋषि के आश्रम में अनसूया ने सीता का स्वागत किया, उन्हें पतिव्रता धर्म की कथा सुनाई और अंगराग (प्रसाधन सामग्री) भेंट की। यह राम के वनवास के दौरान ऋषियों के साथ संवाद और सीता के स्त्री-धर्म शिक्षा का महत्वपूर्ण प्रसंग है।
📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष
"समागमम्" तृतीया विभक्ति के साथ प्रयुक्त है। "अनसूयासमाख्या" में समाख्या का अर्थ कथा या वर्णन है। "अङ्गराग" वह लेप है जो स्त्रियाँ सौंदर्य प्रसाधन हेतु लगाती हैं।
🕉️ आध्यात्मिक संदेश
ऋषियों के दर्शन और उनके आशीर्वाद से राम को वनवास में भी शक्ति मिली। अनसूया जैसी सती स्त्री के उपदेश से सीता को धर्म का ज्ञान हुआ। यह दर्शाता है कि सत्संग और गुरुजनों के आशीर्वाद से जीवन में कठिनाइयाँ सरल हो जाती हैं।
॥ सत्संगतिः परमं सुखम् – सत्संग परम सुख है ॥