राम की कहानी – श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

पादुकाग्र्याभिषेकं च नन्दिग्रामनिवासनम् । दण्डकारण्यगमनं विराधस्य वधं तथा ॥

हिंदी अनुवाद

पादुकाओं का अभिषेक, नन्दिग्राम में निवास, दण्डकारण्य जाना और विराध का वध।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में भरत द्वारा राम की पादुकाओं का राज्याभिषेक कर नन्दिग्राम में निवास, तत्पश्चात् राम का दण्डकारण्य प्रवेश और वहाँ विराध राक्षस के वध का उल्लेख है।

टिप्पणी

भरत राम की पादुकाएँ लेकर अयोध्या लौटे और उन्हें राजसिंहासन पर स्थापित कर स्वयं नन्दिग्राम में रहे। राम, सीता और लक्ष्मण दण्डकारण्य वन में गए, जहाँ उन्होंने विराध नामक राक्षस का वध किया।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक १७ ॥

पादुकाग्र्याभिषेकं च नन्दिग्रामनिवासनम् ।
दण्डकारण्यगमनं विराधस्य वधं तथा ॥
pādukāgryābhiṣekaṃ ca nandigrāmanivāsanam |
daṇḍakāraṇyagamanaṃ virādhasya vadhaṃ tathā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : पादुकाओं का अभिषेक, नन्दिग्राम में निवास, दण्डकारण्य जाना और विराध का वध।

🔹 English Translation : The consecration of the sandals, dwelling in Nandigrama, going to Dandakaranya, and the killing of Viradha.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृत पदव्याकरणहिन्दी अर्थEnglish Meaning
पादुकाग्र्याभिषेकम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनश्रेष्ठ पादुकाओं का अभिषेकconsecration of the sacred sandals
अव्ययऔरand
नन्दिग्रामनिवासनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचननन्दिग्राम में निवासdwelling in Nandigrama
दण्डकारण्यगमनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनदण्डकारण्य जानाgoing to Dandakaranya forest
विराधस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनविराध राक्षस काof the demon Viradha
वधम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनवधkilling, slaying
तथाअव्ययइसी प्रकारalso, similarly

📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व

भरत ने राम की पादुकाओं का विधिवत अभिषेक किया और उन्हें राजसिंहासन पर स्थापित किया। स्वयं वे नन्दिग्राम में रहे, वहाँ तपस्वी की भाँति राम की प्रतीक्षा करते रहे। दूसरी ओर, राम दण्डकारण्य वन में पहुँचे, जहाँ विराध नामक भयंकर राक्षस ने उन पर आक्रमण किया। राम और लक्ष्मण ने उसे मार डाला। यह राम के वनवास के दौरान पहला राक्षस-वध था।

📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष

"पादुकाग्र्य" में अग्र्य का अर्थ श्रेष्ठ, मुख्य है। "अभिषेकम्" राज्याभिषेक की क्रिया। "नन्दिग्राम" अयोध्या के समीप का ग्राम। "विराधस्य वधम्" – विराध का वध, जो आगामी राक्षस-संहार की पूर्वसूचना है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

भरत का पादुकाभिषेक और नन्दिग्राम निवास उनकी अनन्य भक्ति एवं त्याग का प्रतीक है। राम का विराध-वध बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रारंभिक उदाहरण है। यह दर्शाता है कि धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक होने पर बल का प्रयोग भी उचित है।

॥ रक्षांसि भीतानि दिशः प्रदुद्रुवुः – राक्षस भयभीत होकर भागे ॥