अयोध्या का वर्णन – श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
तां तु राजा दशरथो महाराष्ट्रविवर्धनः। पुरीमावासयामास दिवि देवपतिर्यथा॥
हिंदी अनुवाद
उस पुरी (अयोध्या) में राजा दशरथ ने निवास किया, जो महाराष्ट्र के विवर्धन (बढ़ाने वाले) थे, जैसे स्वर्ग में देवराज इंद्र निवास करते हैं।
अर्थ / व्याख्या
इस श्लोक में राजा दशरथ का अयोध्या में निवास और उनके ऐश्वर्य का वर्णन है।
टिप्पणी
दशरथ को इंद्र के समान बताकर उनके तेज और प्रताप का संकेत मिलता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक ९ ॥
पुरीमावासयामास दिवि देवपतिर्यथा॥
purīm āvāsayāmāsa divi devapatir yathā ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : उस पुरी (अयोध्या) में राजा दशरथ ने निवास किया, जो महाराष्ट्र के विवर्धन (बढ़ाने वाले) थे, जैसे स्वर्ग में देवराज इंद्र निवास करते हैं।
🔹 English Translation : In that city, King Dasharatha, the augmenter of the great kingdom, resided, just as the lord of gods (Indra) dwells in heaven.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| ताम् | सर्वनाम, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | उस (पुरी) को |
| तु | अव्यय | तो (जोर देने के लिए) |
| राजा | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | राजा |
| दशरथः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | दशरथ |
| महाराष्ट्रविवर्धनः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (महाराष्ट्र + विवर्धन) | महान राज्य को बढ़ाने वाला |
| पुरीम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | पुरी में |
| आवासयामास | क्रिया (आ + वस् धातु), लिट् लकार, प्रथमपुरुष एकवचन | निवास किया, बसाया |
| दिवि | पुल्लिंग, सप्तमी एकवचन (दिव् शब्द) | स्वर्ग में |
| देवपतिः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | देवताओं के स्वामी (इंद्र) |
| यथा | अव्यय | जैसे |
📖 दशरथ की महिमा
दशरथ इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजा थे। "महाराष्ट्रविवर्धनः" कहकर उनके शासन में राज्य की उन्नति का संकेत है। उनकी तुलना देवराज इंद्र से की गई है, जिससे उनके ऐश्वर्य, बल एवं धार्मिकता का पता चलता है। अयोध्या उनके निवास से स्वर्ग के समान शोभायमान थी।
🕉️ सन्देश
इस श्लोक से हम समझते हैं कि धर्मात्मा राजा के निवास से पृथ्वी भी स्वर्ग तुल्य हो जाती है। राजा का कर्तव्य है कि वह प्रजा का पालन और राज्य का विस्तार करे।