अयोध्या का वर्णन – श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

कपाटतोरणवतीं सुविभक्तान्तरापणाम्। सर्वयन्त्रायुधवतीमुषितां सर्वशिल्पिभिः॥

हिंदी अनुवाद

(वह पुरी) विशाल द्वारों और तोरणों से युक्त, सुव्यवस्थित बाजारों वाली, सभी प्रकार के यंत्रों और अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित, तथा सभी शिल्पियों से बसी हुई थी।

अर्थ / व्याख्या

अयोध्या के दुर्ग, बाज़ार, अस्त्र-शस्त्र और शिल्पियों का वर्णन।

टिप्पणी

अयोध्या सैन्य दृष्टि से सुरक्षित और आर्थिक दृष्टि से समृद्ध थी।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक १० ॥

कपाटतोरणवतीं सुविभक्तान्तरापणाम्।
सर्वयन्त्रायुधवतीमुषितां सर्वशिल्पिभिः॥
kapāṭatoraṇavatīṃ suvibhaktāntarāpaṇām |
sarvayantrāyudhavatīm uṣitāṃ sarvaśilpibhiḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : (वह पुरी) विशाल द्वारों और तोरणों से युक्त, सुव्यवस्थित बाजारों वाली, सभी प्रकार के यंत्रों और अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित, तथा सभी शिल्पियों से बसी हुई थी।

🔹 English Translation : (That city) was endowed with gates and arches, had well-divided markets, was full of all kinds of machines and weapons, and was inhabited by all artisans.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
कपाटतोरणवतीम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन (कपाट + तोरण + वती)कपाट (दरवाजे) और तोरण (मेहराब) वाली
सुविभक्तान्तरापणाम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन (सुविभक्त + अन्तर + आपण)सुव्यवस्थित आंतरिक बाजारों वाली
सर्वयन्त्रायुधवतीम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन (सर्व + यन्त्र + आयुध + वती)सभी यंत्रों और अस्त्र-शस्त्रों वाली
उषिताम्क्रिया (वस् धातु) निष्ठा, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनबसी हुई
सर्वशिल्पिभिःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचन (सर्व + शिल्पिन्)सभी शिल्पियों द्वारा

📖 अयोध्या की सुरक्षा एवं समृद्धि

इस श्लोक में अयोध्या के सुरक्षा पक्ष (कपाट, तोरण, यंत्र-अस्त्र) और आर्थिक पक्ष (बाजार, शिल्पी) दोनों का वर्णन है। "कपाट" बड़े दरवाजे और "तोरण" सजावटी मेहराब दुर्ग की मजबूती और सौंदर्य के प्रतीक हैं। "सुविभक्तान्तरापणाम्" से पता चलता है कि बाजार सुव्यवस्थित थे, जहाँ विभिन्न वस्तुएँ बिकती थीं। "सर्वयन्त्रायुधवतीम्" से नगरी की सैन्य तत्परता और तकनीकी ज्ञान का बोध होता है। "सर्वशिल्पिभिः उषिताम्" का अर्थ है कि यहाँ सभी प्रकार के कारीगर निवास करते थे, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

🕉️ प्रासंगिकता

यह श्लोक एक आदर्श राजधानी के सभी आवश्यक तत्वों को उजागर करता है – सुरक्षा, व्यापार, रक्षा उपकरण और कुशल जनशक्ति।