अयोध्या का वर्णन – श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
सूतमागधसम्बाधां श्रीमतीमतुलप्रभाम्। उच्चाट्टालध्वजवतीं शतघ्नीशतसंकुलाम्॥
हिंदी अनुवाद
स्तुति-पाठ करने वाले सूत और वंशावली का बखान करने वाले मागध वहाँ भरे हुए थे। वह पुरी सुन्दर शोभा से सम्पन्न थी। उसकी सुषमा की कहीं तुलना नहीं थी। वहाँ ऊँची-ऊँची अट्टालिकाएँ थीं, जिनके ऊपर ध्वज फहराते थे। सैकड़ों शतघ्नियों से वह पुरी व्याप्त थी।
अर्थ / व्याख्या
यह श्लोक अयोध्या की सांस्कृतिक समृद्धि, वैभव और सुरक्षा व्यवस्था का वर्णन करता है। सूत और मागध राजाओं की प्रशस्ति गाते थे, जिससे नगर सदा उत्साहित रहता था। ऊँचे ध्वज और यंत्र (शतघ्नी) नगर की अभेद्यता के प्रतीक हैं।
टिप्पणी
शतघ्नी एक प्राचीन अस्त्र था – माना जाता है कि यह एक प्रकार का गोला या पत्थर फेंकने का यंत्र था, जो सौ शत्रुओं को एक साथ मार सकता था। इसकी उपस्थिति अयोध्या की उन्नत युद्धनीति को दर्शाती है।
॥ श्रीरामायण बालकाण्ड सर्ग ५ श्लोक ११ ॥
उच्चाट्टालध्वजवतीं शतघ्नीशतसंकुलाम् ॥
uccāṭṭāladhvajavatīṃ śataghnīśatasaṃkulām ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : स्तुति-पाठ करने वाले सूत और वंशावली का बखान करने वाले मागध वहाँ भरे हुए थे। वह पुरी सुन्दर शोभा से सम्पन्न थी। उसकी सुषमा की कहीं तुलना नहीं थी। वहाँ ऊँची-ऊँची अट्टालिकाएँ थीं, जिनके ऊपर ध्वज फहराते थे। सैकड़ों शतघ्नियों से वह पुरी व्याप्त थी।
🔹 English Translation : The city was filled with bards (Sutas) and genealogists (Magadhas). It was glorious and of incomparable splendor. It had high palaces with flags flying atop them, and was crowded with hundreds of śataghnís (military weapons or stone-throwing machines).
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| सूतमागधसम्बाधाम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | सूत (प्रशंसक) और मागध (वंशावली जानने वाले) से व्याप्त |
| श्रीमतीम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | शोभा से युक्त |
| अतुलप्रभाम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | अतुलनीय प्रभा वाली |
| उच्चाट्टालध्वजवतीम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | ऊँचे अट्टाल (महल) और ध्वजों से युक्त |
| शतघ्नीशतसंकुलाम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | सैकड़ों शतघ्नियों (अस्त्रों) से घिरी |
📜 श्लोक का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह श्लोक अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को उजागर करता है। सूत और मागध राजदरबार के अभिन्न अंग थे – वे राजाओं की कीर्ति गाते और वंश परंपरा सुनाते थे। अट्टालिकाओं पर फहराते ध्वज नगर की गरिमा और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। शतघ्नी का उल्लेख बताता है कि अयोध्या के पास उन्नत सैन्य तकनीक थी, जो शत्रुओं को निष्फल कर देती थी।
वाल्मीकि ने इस श्लोक के माध्यम से एक आदर्श राजधानी के लक्षण बताए हैं – जहाँ कलाकार, इतिहासकार, सुरक्षा व्यवस्था और वैभव सभी विद्यमान हों।
🕉️ आध्यात्मिक संदेश
यह श्लोक हमें सिखाता है कि एक आदर्श नगर या समाज केवल भौतिक सुख-सुविधाओं से ही नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और सुरक्षा के समन्वय से विकसित होता है। सूत और मागध जैसे वर्ग समाज में ज्ञान एवं कीर्ति के संवाहक होते हैं। शतघ्नी का अर्थ आत्मरक्षा की तत्परता भी है – हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों की रक्षा के लिए सदा सजग रहना चाहिए।
॥ सूतमागधैः कीर्तिः, शतघ्नीभिः सुरक्षा ॥
जय श्री राम 🙏