अयोध्या का वर्णन – श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
राजमार्गेण महता सुविभक्तेन शोभिता। मुक्तपुष्पावकीर्णेन जलसिक्तेन नित्यशः॥
हिंदी अनुवाद
वह नगरी बड़े और सुव्यवस्थित राजमार्ग से सुशोभित थी, जो सदा बिखरे हुए फूलों से पटा और जल से सींचा जाता था।
अर्थ / व्याख्या
अयोध्या के राजमार्ग की स्वच्छता एवं सौंदर्य का वर्णन।
टिप्पणी
प्राचीन काल में राजमार्गों पर फूल बिछाने और जल छिड़कने की परंपरा स्वागत एवं शुद्धि के लिए थी।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक ८ ॥
मुक्तपुष्पावकीर्णेन जलसिक्तेन नित्यशः॥
muktapuṣpāvakīrṇena jalasiktena nityaśaḥ ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : वह नगरी बड़े और सुव्यवस्थित राजमार्ग से सुशोभित थी, जो सदा बिखरे हुए फूलों से पटा और जल से सींचा जाता था।
🔹 English Translation : That city was adorned with a great and well-divided royal road, which was always strewn with scattered flowers and sprinkled with water.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| राजमार्गेण | पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | राजमार्ग से |
| महता | विशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | बड़े, विशाल |
| सुविभक्तेन | विशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | सुव्यवस्थित, अच्छी तरह विभाजित |
| शोभिता | क्रिया (शुभ् धातु), कर्मणि प्रयोग, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | सुशोभित की गई (थी) |
| मुक्तपुष्पावकीर्णेन | विशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (मुक्त + पुष्प + अवकीर्ण) | बिखरे हुए फूलों से पटे हुए |
| जलसिक्तेन | विशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (जल + सिक्त) | जल से सींचे हुए |
| नित्यशः | अव्यय | सदा, नियमित रूप से |
📖 सांस्कृतिक महत्त्व
राजमार्ग का नित्य फूलों से पटा होना और जल से सींचा जाना यह दर्शाता है कि अयोध्या में साफ-सफाई और सौंदर्य का विशेष ध्यान रखा जाता था। यह नगरी की समृद्धि और नागरिकों की सुख-सुविधा का प्रतीक है।
🕉️ सन्देश
यह श्लोक हमें सिखाता है कि हमारे पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना चाहिए, जैसे अयोध्या के राजमार्ग हमेशा पुष्पों से सजे रहते थे।