अयोध्या का वर्णन – श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

आयता दश च द्वे च योजनानि महापुरी। श्रीमती त्रीणि विस्तीर्णा सुविभक्तमहापथा॥

हिंदी अनुवाद

वह महापुरी (अयोध्या) बारह योजन लम्बी और तीन योजन चौड़ी थी, तथा सुन्दर एवं सुव्यवस्थित राजमार्गों वाली थी।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक अयोध्या के विशाल आकार और सुनियोजित सड़कों का वर्णन करता है।

टिप्पणी

एक योजन लगभग 8-9 मील (13-14 किमी) के बराबर होता है, अतः अयोध्या लगभग 100 किमी लम्बी और 25 किमी चौड़ी थी – यह विराट नगरी थी।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक ७ ॥

आयता दश च द्वे च योजनानि महापुरी।
श्रीमती त्रीणि विस्तीर्णा सुविभक्तमहापथा॥
āyatā daśa ca dve ca yojanāni mahāpurī |
śrīmatī trīṇi vistīrṇā suvibhaktamahāpathā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : वह महापुरी (अयोध्या) बारह योजन लम्बी और तीन योजन चौड़ी थी, तथा सुन्दर एवं सुव्यवस्थित राजमार्गों वाली थी।

🔹 English Translation : That great city (Ayodhya) was twelve yojanas long and three yojanas wide, beautiful and with well-planned wide roads.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
आयताविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनलम्बी
दश च द्वे चसंख्याबारह (१० + २)
योजनानिनपुंसकलिंग, द्वितीया बहुवचनयोजन (माप)
महापुरीस्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनमहानगरी
श्रीमतीविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनसुंदर, समृद्ध
त्रीणिसंख्या, नपुंसकलिंग, द्वितीया बहुवचनतीन
विस्तीर्णाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनफैली हुई, चौड़ी
सुविभक्तमहापथाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन (सु + विभक्त + महापथ)सुव्यवस्थित राजमार्गों वाली

📖 नगर नियोजन का आदर्श

यह श्लोक अयोध्या के उत्कृष्ट नगर नियोजन को दर्शाता है। विशाल आकार, सुनियोजित सड़कें (महापथ) और सौन्दर्य (श्रीमती) – ये सब एक आदर्श नगरी के लक्षण हैं। यहाँ "सुविभक्त" का अर्थ है सड़कें ठीक से बाँटी गईं, अर्थात मुख्य मार्ग और गलियाँ सुव्यवस्थित थीं।

🕉️ प्रासंगिकता

इस वर्णन से पता चलता है कि प्राचीन भारत में नगर नियोजन की उन्नत परंपरा थी, और अयोध्या उसका उत्कृष्ट उदाहरण थी।