अयोध्या का वर्णन – श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अयोध्या नाम नगरी तत्रासील्लोकविश्रुता। मनुना मानवेन्द्रेण या पुरी निर्मिता स्वयम्॥
हिंदी अनुवाद
वहाँ (कोशल देश में) अयोध्या नाम की एक नगरी थी, जो लोक में विश्रुत (प्रसिद्ध) थी। जिसे मनु (वैवस्वत मनु) ने स्वयं बसाया था।
अर्थ / व्याख्या
यह श्लोक अयोध्या नगरी का परिचय देता है, जिसे स्वयं मनु ने बसाया था।
टिप्पणी
अयोध्या को मनु द्वारा निर्मित बताया गया है, जिससे उसकी प्राचीनता और पवित्रता सिद्ध होती है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक ६ ॥
मनुना मानवेन्द्रेण या पुरी निर्मिता स्वयम्॥
manunā mānavendraṇa yā purī nirmitā svayam ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : वहाँ (कोशल देश में) अयोध्या नाम की एक नगरी थी, जो लोक में विश्रुत (प्रसिद्ध) थी। जिसे मनु (वैवस्वत मनु) ने स्वयं बसाया था।
🔹 English Translation : There (in Kosala) was the city named Ayodhya, renowned in the world, which was built by Manu himself, the lord of men.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| अयोध्या | स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | अयोध्या नगरी |
| नाम | अव्यय | नामक |
| नगरी | स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | नगरी |
| तत्र | अव्यय | वहाँ |
| आसीत् | क्रिया, लङ्, प्रथमपुरुष एकवचन | थी |
| लोकविश्रुता | विशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | लोक में प्रसिद्ध |
| मनुना | पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | मनु द्वारा |
| मानवेन्द्रेण | पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (मानव + इंद्र) | मनुष्यों के इंद्र (राजा) |
| या | सर्वनाम, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | जिस (नगरी) ने |
| पुरी | स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | पुरी |
| निर्मिता | क्रिया (निर् + मि धातु) निष्ठा, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | निर्मित की गई |
| स्वयम् | अव्यय | स्वयं |
📖 अयोध्या की पौराणिकता
अयोध्या को सूर्यवंश की राजधानी होने का गौरव प्राप्त है। मनु वैवस्वत, जिनसे सूर्यवंश आरम्भ होता है, ने इस नगरी को बसाया। "लोकविश्रुता" कहकर इसकी विश्वव्यापी ख्याति का संकेत है। अयोध्या का अर्थ है "जिसे युद्ध से न जीता जा सके"।
🕉️ महत्त्व
यह श्लोक अयोध्या को साक्षात देवनगरी के समान बताता है, जहाँ भगवान राम ने अवतार लिया।