अयोध्या का वर्णन – श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

कोशलो नाम मुदितः स्फीतो जनपदो महान्। निविष्टः सरयूतीरे प्रभूतधनधान्यवान्॥

हिंदी अनुवाद

कोशल नाम का एक प्रसन्न, समृद्ध और महान जनपद था, जो सरयू नदी के तट पर बसा हुआ था और अत्यधिक धन-धान्य से परिपूर्ण था।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक अयोध्या की नगरी के स्थान – कोशल जनपद – का परिचय देता है।

टिप्पणी

यहाँ कोशल जनपद की समृद्धि का वर्णन है, जिसकी राजधानी अयोध्या थी।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक ५ ॥

कोशलो नाम मुदितः स्फीतो जनपदो महान्।
निविष्टः सरयूतीरे प्रभूतधनधान्यवान्॥
kośalo nāma muditaḥ sphīto janapado mahān |
niviṣṭaḥ sarayūtīre prabhūtadhanadhānyavān ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : कोशल नाम का एक प्रसन्न, समृद्ध और महान जनपद था, जो सरयू नदी के तट पर बसा हुआ था और अत्यधिक धन-धान्य से परिपूर्ण था।

🔹 English Translation : There was a joyful, prosperous and great province named Kosala, situated on the banks of the Sarayu, abounding in wealth and grain.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
कोशलःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनकोशल देश
नामअव्ययनामक
मुदितःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनप्रसन्न
स्फीतःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसमृद्ध, फला-फूला
जनपदःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजनपद, देश
महान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहान, बड़ा
निविष्टःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनस्थित, बसा हुआ
सरयूतीरेनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचन (सरयू + तीर)सरयू नदी के तट पर
प्रभूतधनधान्यवान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (प्रभूत + धन + धान्य + वत्)प्रचुर धन और अन्न वाला

📖 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कोशल प्राचीन भारत का एक प्रमुख महाजनपद था। इसकी राजधानी अयोध्या थी, जहाँ सूर्यवंशी राजा राज्य करते थे। सरयू नदी (आधुनिक घाघरा) के तट पर बसा यह प्रदेश अत्यंत उपजाऊ और समृद्ध था। "मुदितः" और "स्फीतः" शब्द बताते हैं कि प्रजा सुखी और धन-धान्य से परिपूर्ण थी।

🕉️ आध्यात्मिक संदर्भ

यह श्लोक हमें बताता है कि राम जन्मभूमि अयोध्या कितनी समृद्ध और सुखी थी, जहाँ धर्म का पालन होता था और प्रकृति भी मनोहर थी।