अयोध्या का वर्णन – श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

तदिदं वर्तयिष्यावः सर्वं निखिलमादितः। धर्मकामार्थसहितं श्रोतव्यमनसूयता॥

हिंदी अनुवाद

इसलिए हम इस सम्पूर्ण रामायण को आदि से अंत तक, धर्म, अर्थ और काम सहित, ईर्ष्या रहित होकर सुनना चाहिए।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक रामायण सुनने के महत्व और उसके फल का उपदेश देता है।

टिप्पणी

यह श्लोक श्रोता को निर्देश देता है कि रामायण को ध्यानपूर्वक और बिना द्वेष के सुनना चाहिए।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक ४ ॥

तदिदं वर्तयिष्यावः सर्वं निखिलमादितः।
धर्मकामार्थसहितं श्रोतव्यमनसूयता॥
tad idaṃ vartayiṣyāvaḥ sarvaṃ nikhilam āditaḥ |
dharma kāmārtha sahitam śrotavyam anasūyatā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : इसलिए हम इस सम्पूर्ण रामायण को आदि से अंत तक, धर्म, अर्थ और काम सहित, ईर्ष्या रहित होकर सुनना चाहिए।

🔹 English Translation : Therefore, we should narrate this entire Ramayana from the beginning to the end, which includes dharma, artha and kama, and it should be listened to without envy.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तत्अव्ययइसलिए
इदम्सर्वनाम, नपुंसक, प्रथमा एकवचनयह
वर्तयिष्यावःक्रिया, लृट् (भविष्यत्), उत्तमपुरुष बहुवचन (वृत् धातु)हम कहेंगे (वर्णन करेंगे)
सर्वम्विशेषण, नपुंसक, द्वितीया एकवचनसम्पूर्ण
निखिलम्विशेषण, नपुंसक, द्वितीया एकवचनपूर्ण रूप से
आदितःअव्ययआदि से
धर्मकामार्थसहितम्विशेषण, नपुंसक, द्वितीया एकवचन (धर्म + काम + अर्थ + सहित)धर्म, काम और अर्थ सहित
श्रोतव्यम्क्रिया (श्रु धातु) विधिलिङ्, नपुंसक, प्रथमा एकवचनसुनने योग्य, सुनना चाहिए
अनसूयताविशेषण, तृतीया एकवचन (अनसूया शब्द से)ईर्ष्या रहित होकर

📖 उपदेश

यह श्लोक रामायण श्रवण की विधि बताता है। इसे "धर्मकामार्थसहित" कहा गया है, अर्थात यह ग्रंथ मनुष्य के जीवन के तीनों पुरुषार्थों – धर्म, अर्थ और काम – को सिखाता है, और अंत में मोक्ष का भी मार्ग दिखाता है। "अनसूयता" का अर्थ है बिना द्वेष या ईर्ष्या के, निष्पक्ष भाव से सुनना।

🕉️ सुनने का महत्व

रामायण सुनने से मनुष्य को धर्म का ज्ञान, अर्थ की प्राप्ति और काम की पूर्ति होती है, और वह आसक्ति रहित होकर मोक्ष की ओर बढ़ता है।